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ध्वस्त होकर नया लैंडमार्क बनेगा जयदेवा फ्लाइओवर

तीन चरणों में फ्लाइओवर को गिराने का काम पूराफरवरी 2005 में हुआ था उद्घाटनवर्ष 2018 से ध्वस्त करने का शुरू हुआ काम
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ध्वस्त होकर नया लैंडमार्क बनेगा जयदेवा फ्लाइओवर

ध्वस्त होकर नया लैंडमार्क बनेगा जयदेवा फ्लाइओवर

बेंगलूरु.
शहर का एक प्रमुख लैंडमार्क जयदेवा फ्लाइओवर धूल में मिलकर एक नए स्वरूप में उभरने की राह पर है। कुछ ही दिनों में यह फ्लाइओवर पूरी तरह धूल में मिल जाएगा और बेंगलूरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन निगम लिमिटेड (बीएमआरसीएल) यहां बहुस्तरीय मेट्रो स्टेशन सह फ्लाइओवर का निर्माण कराएगा।

दरअसल, यह फ्लाइओवर 15 वर्ष पूर्व 21 करोड़ की लागत से तैयार हुआ था। बेंगलूरु विकास प्राधिकरण ने इस फ्लाइओवर को बनवाया था। बीएमआरसीएल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी यशवंत चव्हाण के मुताबिक इस मेट्रो स्टेशन का ढहाए जाने से 6 हजार क्यूबिक मीटर मलबा पैदा हुआ जिसे बीबीएमपी द्वारा चिन्हित चिक्कजला खदान में डंप किया गया। फ्लाइओवर को लगभग ढहा दिया गया है और कुछ ही निर्माण रह गए हैं जो अगले कुछ दिनों में गिरा दिए जाएंगे। सबकुछ साफ कर दिया जाएगा।

दरअसल, वर्ष 2019 में कई समय-सीमा पार करने के बाद बीएमआरसीएल ने इसे चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त करने का फैसला किया। पिछले वर्ष फ्लाइओवर के एक घेरे को गिराया गया। जुलाई माह में इस घेरे को गिराया गया था जिसके बाद दोपहिया वाहन चालकों को काफी परेशानियां हुईं। जनवरी 2020 में बीएमआरसीएल मुख्य सड़क को भी ध्वस्त करा दिया। लेकिन, इसके बाद लॉकडाउन के कारण परियोजना ठप हो गई। पिछले 23 अप्रेल को फिर एक बार फ्लाइओवर को गिराने का काम शुरू हुआ। कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए तमाम एहितायती कदम के साथ परियोजना शुरू हुई। परियोजना फिर से शुरू करने से पहले यातायात मार्ग में बदलाव किया गया। चव्हाण ने बताया कि परियोजना के ठेकेदार ने पहले ही फ्लाइओवर के दोनों ओर सड़क-सह-मेट्रो फ्लाइओवर के लिए खंभे बनाए हैं। विध्वंस कार्य पूरा करने के बाद मेट्रो स्टेशन परियोजनाएं शुरू हो जाएंगी।

देश का पहला छह स्तरीय सड़क-सह-रेल फ्लाइओवर
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह देश का पहला छह-स्तरीय सड़क-सह-रेल फ्लाइओवर होगा। इससे नामा मेट्रो की संरचनाएं भी संबद्ध होंगी और इस परियोजना के अगले साल दिसंबर तक तैयार हो जाने की उम्मीद है। पहले इस परियोजना के लिए जो समय सीमा तय की गई थी उसमें अब छह माह की देरी की संभावना है। परियोजना में देरी की वजह कोविड-19 लॉकडाउन और प्रवासी श्रमिकों का अपने गृहनगर लौटना है।
परियोजना के इंजीनयर एन.सदाशिव के मुताबिक मेट्रो फेज -2 के रीच 5 के पैकेज 3 के रूप में विकसित यह संरचना 35 मीटर ऊंची होगी और इसकी अधिकतम चौड़ाई 43 मीटर होगी। उप मुख्य अभियंता एन सदाशिव ने कहा। उन्होंने कहा कि फ्लाइओवर छह स्तरीय होगा और अंडरपास ग्राउंड लेवल के नीचे होगा। बनेरघट्टा रोड से डेयरी सर्किल तक अंडरपास में दो लेन होंगे जिससे दो तरफा यातायात की की सुविधा होगी। आर. वी. रोड और सेंट्रल सिल्क बोर्ड (सीएसबी) के बीच की सतह की सड़क प्रत्येक दिशा में चार लेन की होगी। यह फ्लाइओवर रागीगुड़ा और सीएसबी के बीच 3.2 किमी लंबा होगा। रेल लाइन आर.वी रोड, इलेक्ट्रोनिक सिटी, बन्नेरघट्टा और नागवाड़ा को जोड़ेगी। रीच-5 के पैकेज-3 की लागत 797 करोड़ रुपए आएगी। इसमें आरवी रोड से सीएसबी के बीच पांच मेट्रो स्टेशनों के निर्माण पर आने वाली लागत भी शामिल है। ये पांच मेट्रो स्टेशन होंगे आरवी रोड, रागीगुड़ा, जयदेव इंटरचेंज, बीटीएम लेआउट और सेंट्रल सिल्क बोर्ड। सदाशिव ने कहा कि पहले परियोजना के निर्माण के लिए जून 2021 की समय सीमा थी, लेकिन अब कोविड-19 के कारण दिसंबर 2021 तक पूरी होने की उम्मीद है।

मेट्रो ने बैंकों से मांगा 500 करोड़ का ओवरड्राफ्ट
मेट्रो परियोजनाओं के दूसरे चरण को लागू करने में देरी और लॉकडाउन के कारण हुए नुकसान के चलते बीएमआरसीएल ने बैंकों से ओवरड्राफ्ट के रूप में 500 करोड़ रुपए की मांग की है। निगम को पैसों की जरूरत है क्योंकि सरकार से भी पैसे जारी होने में देरी की उम्मीद है। राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बीएमआरसीएल ने कहा है कि अप्रेल-मई के दौरान नम्मा मेट्रो बंद रहने के कारण उसे किराया तथा गैर किराया राजस्व में 74 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यहां तक की मार्च भी भी मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या घटा दी गई थी जिससे उसे नुकसान उठाना पड़ा। मार्च में उसे 40 करोड़ रुपए आय की उम्मीद थी जो कि 24.35 करोड़ रुपए ही हुई। वहीं, वित्तीय वर्ष 209-20 के दौरान यह घाटा मामूली रहा क्योंकि लक्ष्य 445 करोड़ रुपए का था जो जबकि आय 430 करोड़ रुपए हुई। लेकिन, चालू वित्तीय वर्ष में इसका असर व्यापक रहेगा।

नगदी संकट नहीं
बीएमआरसीएल के प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया कि निगम के पास नगदी संकट फिलहाल नहीं है। निगम के पास कई परियोजनाओं का फंड है जिसकी एक छोटी सी राशि से वह अगले कुछ महीनों के दौरान वेतन, आवश्यक रखरखाव तय खर्च में इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन, आगे चलकर परियोजना की वह राशि पुन: उस खाते में डालनी होगी।