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मुमुक्षु सलोनी चौहान बनी साध्वी चैत्यप्रज्ञाश्री

दीक्षा दिवस

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मुमुक्षु  सलोनी चौहान बनी साध्वी चैत्यप्रज्ञाश्री

मुमुक्षु सलोनी चौहान बनी साध्वी चैत्यप्रज्ञाश्री

बेंगलूरु. पार्श्व सुशीलधाम में दीक्षा दिवस पर आयोजित उत्सव में आचार्य अरविंद सागर सूरीश्वर ने मुमुक्षु सलोनीकुमारी चौहान का नया नाम रखा साध्वी चैत्यप्रज्ञाश्री रखा। शुभ मंगल वेला में आचार्य ने वज्रपंजर स्तोत्र के साथ आत्मरक्षा विधी कराई तथा विरति धर्म के लिए महामंगलकारी क्रिया करवाई। गणिवर्य अमरपद्मसागर ने कहा कि सलोनी का कई वर्षों से किया पुरुषार्थ फलित हो रहा है। इस रजोहरण प्राप्त करने,विरति वेश पाने के लिए मुमुक्षु की उत्कंठा देखने लोग यहां आए हैं। विरति वेश की छाब के साथ हर्षोल्लास व्यक्त करते चौहान परिवार ने आनंद-उमंग-उत्साह से गुरु चरणों में वंदन कर गुरु भगवंत से वासक्षेप लिया। मुमुक्षु सलोनी का प्रथम विजय तिलक शांताबेन रसिकलाल शाह, चौहान एवं नाहर परिवार ने किया। सलोनी ने ब्रह्ममुहूर्त में परमात्मा की अंतिम बार स्पर्शना, अष्ट प्रकारी पूजा के साथ-साथ स्नात्र पूजा-मंगल दीपक आरती शांति कलश विधी कर परमात्मा के जन्मोत्सव को मनाया। मुमुक्षु ने संयम जीवन पाने से पूर्व अंतिम बार संसार की सामग्री, उत्तम द्रव्य के साथ परमात्मा की अंतिम द्रव्य पूजा की। साध्वी वृन्द के साथ नूतन दीक्षित का क्रिया मंडप में शुभ मुहूर्त में प्रवेश। साध्वी भगवंतों ने केश लोचन किया। गुरु भगवंत से सर्व विरति पच्चखान सामयिक व्रत का लिया। गुरु भगवंत ने नूतन नाम का तीन बार उच्चारण किया। इसके बाद मुमुक्षु कुमारी सलोनी चौहान साध्वी चैत्यप्रज्ञाश्री बन गईं।