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यह देशवासियों के लिए तोहफा: किरण कुमार

पीएसएलवी सी-40 मिशन एएस किरण कुमार के लिए बतौर इसरो अध्यक्ष आखिरी मिशन था

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kiran kumar

बेंगलूरु. पीएसएलवी सी-40 मिशन एएस किरण कुमार के लिए बतौर इसरो अध्यक्ष आखिरी मिशन था। किरण कुमार आगामी 14 जनवरी को सेवानिवृत हो रहे हैं और उनकी जगह विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के.सिवन अध्यक्ष पद संभालेंगे।
मिशन की सफलता पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए किरण कुमार ने इसे देश के लिए नए वर्ष का तोहफा बताया। उन्होंने कहा कि कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रहों का प्रक्षेपण एक बड़ी उपलब्धि रही और इसके लिए इसरो वैज्ञानिकों ने जबरदस्त भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि पीएसएलवी सी-39 मिशन हीट शील्ड समस्या के कारण विफल हो गया था। विफलता की जांच के लिए गठित समिति ने हर पहलू को गौर से देखा और खामी को पकड़ते हुए उसे ठीक किया। इस सफलता से रॉकेट और अधिक संतुलित और विश्वसनीय हुआ है। आज के प्रक्षेपण ने यह स्पष्ट किया कि इसरो वैज्ञानिकों ने विफलता के कारणों को सही तरीके से समझा और उसे दूर करने के लिए सही कदम उठाए। यह नए साल में देशवासियों के लिए एक उपहार है।
श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक पी. कुन्हीकृष्णन ने कहा 'यह मिशन किरण कुमार के लिए एक शानदार तोहफा है। किरण कुमार हमेशा हमारे लिए एक प्रेरणास्रोत रहे हैं और हमेशा हमारा उत्साह बढ़ाया है। साथ ही यह मिशन इसरो के भावी अध्यक्ष के.सिवन के लिए स्वागतयोग्य लांचिंग है।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने बुधवार को के. सिवन की नियुक्ति की मंजूरी दे दी। उनकी नियुक्ति तीन वर्षों के लिए हुई है। इसरो अध्यक्ष के साथ वे अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी होंगे। के. सिवन स्वदेशी स्पेस शटल (आरएलवी-टीडी) और जीएसएलवी रॉकेट के परियोजना निदेशक रहे हैं। इन परियोजनाओं में सफलता का काफी श्रेय सिवन को जाता है।
गौरतलब है कि ए एस किरण कुमार ने 14 जनवरी 2015 को इसरो अध्यक्ष पद संभाला था। उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए हुई थी और वो आगामी 14 जनवरी को सेवानिवृत हो जाएंगे। के. राधाकृष्ण्न की नियुक्ति के बाद नए इसरो अध्यक्ष के चयन में देरी हुई थी और उस दौरान विभागीय सचिव को प्रभारी अध्यक्ष बनाया गया था। बाद में सरकार ने किरण कुमार को अध्यक्ष नियुक्त किया था। इससे पहले निवर्तमान अध्यक्ष की सेवानिवृति के पूर्व ही नए अध्यक्ष को नामित किए जाने की परंपरा थी।