
बेंगलूरु. सीमंधर स्वामी राजेंद्र सूरी संघ, मामूलपेट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास में गुरु राजेंद्र भवन, किलारी रोड में साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि कर्म के प्रभाव से दुर्गति हो और कोई बचा ले, वह धर्म का प्रभाव है जो केवल बचाता ही नहीं है, वरन सुख, सुरक्षा एवं सद्गति भी देता है। धर्म तीन प्रकार से होता है दबाव, प्रभाव एवं स्वभाव। दबाव वश एवं चमत्कार के प्रभाव में आकर किया धर्म, धर्म नहीं है। जब धर्म करते हुए जीवन के कषाय शांत हो जाएं और पाप मिट जाए तब स्वभाव से धर्म कहलाता है। दबाव एवं प्रभाव से किया धर्म अल्पकालीन है एवं स्वभाव से किया धर्म जन्म-जन्म तक साथ देता है।
साध्वी शीतल गुणाश्री ने कहा कि एक दिन हम सबको ऐसे सफर पर जाना है, जिसमे कोई भी खर्च नहीं है। हमारे सभी अच्छे कर्म हमारा सामान होंगे। हमारी इंसानियत हमारा पासपोर्ट, आत्मीयता हमारा वीजा होगा। स्वर्ग तक की इस उड़ान में बिजनेस क्लास में बैठने के लिए, जीवन में जितना हो सके उतना अच्छा करें।
मेघराज भंसाली,मांगीलाल वेदमुथा,नेमीचंद वेदमुथा, कांतिलाल सोफाड़िया,तिलोकचंद भंडारी,कांतिलाल गांधी मुथा कीर्ति कुमार बंदा मुथा दिलीप कांकरिया, गुलाबचंद वाणीगोता,मुकेश जैन जयंतीलाल नाहर,जयंतीलाल पटियात उपस्थित रहे।
Published on:
02 Nov 2023 01:05 pm
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