साध्वीवृन्द का आगामी चातुर्मास राजेन्द्र भवन में
बेंगलूरु . राजेन्द्र सूरी गुरु मंदिर संघ रामचन्द्रपुरम में साध्वी भव्यगुणाश्री ने महामांगलिक के अवसर पर कहा कि पूर्वाचार्यों द्वारा रचित मंत्र सुनने से आधि, व्याधि, रोग, शोक का निवारण होता है। दु:ख से घबराना नहीं चाहिए। वह पाप दूर करने के लिए आता है। कर्जदार आदमी का यदि कर्जा चुक जाता है तो फिर सब काम ठीक हो जाता है। इसलिए दु:ख आए तो भगवान को याद करो। भगवान हमारे पापों को नष्ट कर हमें शुद्ध करते हैं। दु:ख में भक्त की परीक्षा होती है कि यह सच्चा है या कच्चा। उसकी कद्र नहीं होती, जो सच में रिश्तों की कद्र करता है। कद्र उसकी होती है, जो सबसे ज्यादा दिखावा करता है। उन्होंने कहा कि
जैसे फल और फूल किसी की प्रेरणा के बिना ही अपने समय पर वृक्षों में लग जाते हैं, उसी प्रकार किए हुए अच्छे और बुरे कर्म भी अपने आप जीवन में स्वतः फल देने आते रहते हैं। साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि सीमंधर स्वामी राजेन्द्र सूरी गुरु मंदिर संघ मामूलपेट ने साध्वीवृंद से आगामी चातुर्मास की विनती की। साध्वीवृन्द ने स्वीकृति प्रदान करते हुए कहा कि राजेन्द्र सूरी संघ हमारी नींव है। उनकी भक्ति अनुमोदनीय है। विनोद कुमार संघवी ने सभी पधारे हुए अतिथियों का स्वागत किया। महामांगलिक के लाभार्थी परिवार का आभार व्यक्त किया। मेघराज भंसाली, नेमीचंद वेदमूथा, हेमराज मोदी, तिलोकचंद भंडारी, मांगीलाल वेदमूथा, रमेश भंडारी, दिलीप कुमार कांकरिया, कांतिलाल गांधीमूथा ने जय जयकार का उद्घोष किया।इस अवसर पर मनोज परमार, वसंतराज भंसाली, पारस भंसाली, सुनील कुंकुलोल, गौतमचंद लूणिया, रोशनलाल आच्छा आदि उपस्थित रहे।