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कलयुग में संत सान्निध्य ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण-साध्वी भव्यगुणाश्री

धर्मसभा का आयोजन

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कलयुग में संत सान्निध्य ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण-साध्वी भव्यगुणाश्री

कलयुग में संत सान्निध्य ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण-साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु. मेहता एम्बियंस वासुपूज्य स्वामी जैन संघ मागडीरोड में साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि ऋषि मुनियों के त्याग तपस्या साधना बल वाइब्रेशन के ऊपर ही संपूर्ण ब्रह्मांड टिका हुआ है। तीन लोक की संपत्ति दान देकर भी साधना के परमाणु का निर्माण सरकार और विज्ञान कोई नहीं कर सकता। क्रोध के बादल चढ़े बरसन लगे अंगार इस युग में साधु न हो तो जल जाए संसार। धर्म और परमात्मा से साक्षात्कार बिना गुरु के तीन काल में भी संभव नहीं है जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं कलयुग में संत का सान्निध्य ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण है। ऑक्सीजन ना मिले तो एक जन्म का नुकसान है और संत न मिले तो आत्मा का जन्म जन्मांतर में नुकसान है। संत साधना और परमार्थ का ही काम करते हैं जिनकी निगाह में सोना और माटी समान होता है। वही सच्चा संत होता है।

साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है। जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं,इसी में जीवन की सार्थकता है। मनोज परमार ने बताया कि बुधवार सुबह साध्वी विहार करके अक्कीपेट वासुपूज्य स्वामी जैन संघ पहुंचेंगी। नरेंद्र कुमार, चंद्रप्रकाश सुराना परिवार के यहां पगलिया हुआ। तुलसी, राजेश छाजेड़, शीतल जैन ने सेवा भक्ति का लाभ लिया।