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शिवमोग्गा लोस क्षेत्र : पहले पिता और अब बेटे को हराकर राघवेंद्र ने रचा इतिहास

तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों में था मुकाबला चौथे स्थान पर रहे महिमा पटेल मिले नोटा से भी कम वोट

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शिवमोग्गा लोस क्षेत्र : पहले पिता और अब बेटे को हराकर राघवेंद्र ने रचा इतिहास

बेंगलूरु. तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों के बीच शिवमोग्गा लोकसभा क्षेत्र में हुए चुनावी मुकाबले में जीतकर भाजपा के बी वाई राघवेंद्र ने एक बार फिर नया कीर्तिमान बनाया है। राघवेंद्र ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्रों को हराने का कीर्तिमान बनाया है।

साथ ही राघवेंद्र ने एक ही क्षेत्र से पहले पिता और फिर बेटे को हराने का रिकार्ड भी बनाया है। राघवेंद्र के पिता-पुत्र को हराने का अंतर भी लगभग समान है।

पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येड्डियूरप्पा के बेटे राघवेंद्र ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी व पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा के बेटे मधु बंगारप्पाा (जद-एस) को करीब 52 हजार मतों के अंतर से हराया।

राघवेंद इससे पहले 2009 में मधु के पिता एस बंगारप्पा को हराकर पहली बार सांसद बने थे। उस वक्त बंगारप्पा कांग्रेस के उम्मीदवार थे और जद-एस उनका समर्थन कर रहा था।

इस बार कांटे की टक्कर में राघवेंद्र ने मधु को हराकर भाजपा के लिए यह सीट बरकरार रखी। राघवेंद्र ने वर्ष 2009 के चुनाव में बंगारप्पा को 52,893 मतों से हराया था।

बंगारप्पा को 4,29,890 मत मिले थे जबकि राघवेंद्र को 4,82,783 मत मिले थे। इस बार राघवेंद्र ने बंगारप्पा के बेटे मधु को 52,148 मतों से हराया। हालांकि, एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री जे एच पटेल के बेटे महिमा पटेल चौथे स्थान पर रहे।

महिमा को नोटा से भी कम वोट मिला जबकि तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय उम्मीदवार शशिकुमार को महिमा से लगभग दुगुना वोट मिले।

राघवेंद्र की जीत के साथ भाजपा न सिर्फ शिवमोग्गा सीट पर कब्जा बरकरार रखने में सफल रही बल्कि गठबंधन को यह संकेत भी दिया कि इस क्षेत्र में अब भी उसकी पकड़ मजबूत है।

शिवमोग्गा लोकसभा क्षेत्र में जिले की सात और उडुपी जिले की एक विधानसभा सीट ब्यंडूर शामिल है। इनमें से सात सीटों पर भाजपा का जबकि एक सीट पर कांग्रेस जीती थी।

हालांकि, इस क्षेत्र में जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन का फायदा भी भाजपा को मिला जबकि कांग्रेस और जद-एस कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी और प्रतिद्वंदिता के अलावा चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए वक्त के अभाव का असर मधु बंगारप्पा की संभावनाओं पर पड़ा।

हालांकि, उपुचनाव हारने के बावजूद जद-एस ने भाजपा के सबसे मजबूत गढों में से एक और येड्डियूरप्पा के गृह जिले में अच्छा प्रदर्शन किया।

गठबंधन के नेताओं का कहना है कि अगर मधु को संयुक्त उम्मीदवार नहीं बनाया गया होता यहां भाजपा की जीत काफी आसान होती।

कांग्रेस ने अंतिम क्षणों में उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण यह सीट जद-एस के लिए छोड़ दी थी। इडिगा समुदाय से आने वाले मधु को उतार कर गठबंधन ने भाजपा और येड्डियूरप्पा को चुनौती देने की कोशिश की थी और उनका यह दांव सफल भी रहा।

लेकिन जद-एस को सिर्फ तीन विधानसभा क्षेत्रों-सोरब, भ्रदावती और सागर में भी भाजपा पर बढ़त मिली जबकि बाकी पांच विधानसभा क्षेत्रों- शिवमोग्गा ग्रामीण, शिवमोग्गा शहर, शिकारीपुर, तीर्थहल्ली और ब्यंडूर में भाजपा को बढ़त मिली।