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विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति के लिए कुलपति जिम्मेदार

उच्च शिक्षा मंत्री देवेगौड़ा बोले

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विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति के लिए कुलपति जिम्मेदार

बेंगलूरु. उच्च शिक्षा मंत्री जी टी देवेगौड़ा ने गुरुवार को कहा कि राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति के लिए कुलपति और अधिकारी जिम्मेदार हैं। राज्यपाल वजूभाई वाळा की मौजूदगी में एक निजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए देवेगौड़ा ने कहा कि राज्य के निजी विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है लेकिन सरकारी अधिकारियों व कुलपति की उदासीनता के कारण राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों की छवि खराब हो रही है।

देवेगौड़ा ने कहा कि वे सरकारी अधिकारियों व कुलपतियों को निजी विश्वविद्यालयों को देखकर स्तर सुधारने के लिए कहेंगे। देवेगौड़ा ने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों की स्थिति को लेकर अफसोस जताया। देवेगौड़ा ने कहा कि राज्य में कुछ ऐसे कॉलेज भी हैं जिनके पास अपना भवन भी नहीं है। देवेगौड़ा ने कहा कि सरकार के उच्च शिक्षा के लिए करोड़ों रुपए का अनुदान देने के बावजूद सरकारी विश्वविद्यालय और कॉलेज निजी क्षेत्र के संस्थानों का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं।

देवेगौड़ा ने कहा कि देश का भविष्य विद्यार्थियों के हाथ में है। नेता कभी भी देश के विकास के लिए काम नहीं करते। उन्होंने विद्यार्थियों ने अपने दायित्वों का न्यायोचित्त तरीके से निर्वहन करने की अपील की।

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डॉ. रविन्द्रन व मर्मज्ञ विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे
बेंगलूरु. शहर के साहित्यकार कर्नाटक हिन्दी प्रचार समिति के कार्यकारी निदेशक डॉ. टी. रविन्द्रन और अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच के अध्यक्ष ज्ञानचंद मर्मज्ञ मारिशस में 18 से 20 अगस्त तक होने वाले 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से इन्हें भारतीय प्रतिनिधिमण्डल में शामिल किया गया है।

विश्व हिन्दी सम्मेलन में डॉ. रविन्द्रन के काव्य संग्रह 'परिवर्तन के बादÓ और डॉ. सरगु कृष्णमूर्ति कृत 'विश्व काव्य में हनुमानÓ ग्रंथ पर उनकी सम्पादित पुस्तक का विमोचन होगा। बेंगलूरु के सेंट जोसेफ कॉलेज में प्राध्यापक डॉ. रविन्द्रन बेंगलूरु विश्व विद्यालय से एमए हिन्दी में स्वर्ण पदक प्राप्त हैं। उन्हें गोस्वामी तुलसीदास पर विशेष अध्ययन के लिए प्रो. रूबेन प्रशस्ति पत्र, हिन्दी साहित्य परिषद अहमदाबाद की ओर से अखिल भारतीय हिन्दी शोध एवं समीक्षा के लिए ताम्रपत्र प्रशस्ति पुरस्कार प्राप्त हैं। वे हास्य-व्यंग्य कविता, गीत, गजल, आलोचना विधा पर सृजन में सक्रिय हैं। साहित्यकार मर्मज्ञ कविता एवं गद्य लेखन में सक्रिय हैं और उनकी भी काव्य कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं।