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भाषाई रूप से समृद्ध होकर ही दुनिया में स्थापित हो सकते हैं- मिश्रा

दक्षिण और दक्षिण पश्चिम क्षेत्रों का राजभाषा सम्मेलन

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भाषाई रूप से समृद्ध होकर ही दुनिया में स्थापित हो सकते हैं- मिश्रा

भाषाई रूप से समृद्ध होकर ही दुनिया में स्थापित हो सकते हैं- मिश्रा

बेंगलूरु. केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से शुक्रवार को दक्षिण एवं दक्षिण पश्चिम क्षेत्रों का संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन बेंगलूरु के संजय नगर स्थित "हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, प्रबंधन अकादमी" में आयोजित किया गया। इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि गृह राज्य मंत्री अजयकुमार मिश्रा ने देश और दुनिया में हिन्दी की बहुआयामी स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा के विकास का सबसे बेहतर तरीका स्वप्रेरणा ही है। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक नीति अपनाकर ही हम भाषाओं को बढ़ा सकते हैं। प्रधानमंत्री के विजन और नेतृत्व में देश में हो रहे नवप्रयासों और परिवर्तनों की चर्चा करते हुए कहा कि भारत के प्रति दुनिया के बढ़ते आकर्षण का प्रतिफल प्राप्त करने के लिए हमें अपनी भाषाओं की ओर जाने की आवश्यकता है।

मिश्रा ने कहा कि राजभाषा विभाग तकनीकी विकास के कार्य कर रहा है जिसमें कंठस्थ, लीला ऐप, ई -महा शब्दकोश तथा हिंदी शब्द सिंधु आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत के विकास की रफ्तार बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को विश्व के सामने रखा है लगभग 48 देशों में हमारे प्रतिनिधि भाषा और संस्कृति के विकास को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। राजभाषा विभाग का प्रयास है कि स्वप्रेरणा से लक्ष्यों को प्राप्त किया जाए।इससे पूर्व भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हैदराबाद के मुख्य प्रबंध निदेशक कमोडोर ए.माधवराव ने कहा कि दक्षिण में हम शुद्ध हिन्दी नहीं बोल सकते हैं लेकिन बोलने का प्रयास जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में 80 से 90 प्रश्तिात तक मिसाइलों का देशीकरण हुआ है। यूआर राव सेटेलाइट केन्द्र के निदेशक वैज्ञानिक जसविन्दर सिंह खोरल ने कहा कि राजभाषा नियम का पूरा पालन हो रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सभी सहकर्मियों से अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी से राजभाषा हिन्दी का प्रयोग करने पर बल दिया।

बेंगलूरु नराकास के अध्यक्ष व कर्नाटक के मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल एस.राजेन्द्र कुमार ने कहा कि ‘मैंने स्कूल में भी हिन्दी नहीं पढ़ी, कहीं से प्रशिक्षण भी नहीं लिया’, फिर भी हिन्दी में बात करने के साथ लिख व पढ़ सकता हूं। उन्होंने माना कि व्याकरण संबंधी कुछ त्रुटियां हो सकती हैं लेकिन प्रयास जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी अपनी भाषा है। इससे पूर्व केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा व अतिथियों ने विभिन्न विभागों की गृह पत्रिकाओं का विमोचन किया। इस अवसर पर दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में स्थित विभिन्न बैंकों/उपक्रमों/कार्यालयों को राजभाषा कार्यान्वयन में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। इन पुरस्कारों का चयन सूचना प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त तिमाही प्रगति रिपोर्ट के आधार पर किया गया।कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक के मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल एस.राजेन्द्र कुमार ने मुख्य अतिथि व केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री के साथ मंचासीन अतिथियों को रामायण पर आधारित डाक टिकटो का संग्रह पुस्तिका भेंट की। इसरो के निदेशक जसविन्दर सिंह खोरल ने चन्द्रयान की प्रतिकृति केन्द्रीय मंत्री सहित अतिथियों को भेंट की। गृह विभाग के राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव मीनाक्षी जौली ने बताया कि सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुच्चेरी और लक्षद्वीप के अधिकारी व कर्मचारियों ने भी शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलन से हुई। इसके बाद आयोजकों ने गृह राज्यमंत्री का स्वागत अभिनन्दन किया और उन्हें हम्पी की प्रतिकृति भेंट की। केन्द्रीय गृहमंत्री अजयकुमार मिश्रा निर्धारित समय से करीब डेढ़ घंटा विलम्ब से 11:25 बजे समारोह स्थल पर पहुंचे।

गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, दक्षिण के उप-निदेशक अनिर्बान कुमार विश्वास ने और दक्षिण-पश्चिम के सहायक निदेशक हरीश चौहान ने अपने क्षेत्रों में हो रहे राजभाषा कार्यान्वयन कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया। राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या ने स्वागत उद्बोधन दिया। समारोह में हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के सीएमडी सी.बी. अनंतकृष्णन, केनरा बैंक, बेंगलूरु के प्रबंध निदेशक व सीईओ के. सत्यनारायण राजू, राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. मीनाक्षी जौली आदि उपस्थित थे।