
RAILWAY : ई-नीलामी से दो माह में 22 लाख का राजस्व
बेंगलूरु. भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआइआइ), देहरादून कर्नाटक के टीनाघाट से गोवा में कुलेम तक रेलवे लाइन के प्रस्तावित दोहरीकरण के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करेगा। अध्ययन जल्द प्रारंभ होगा।
यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौ मई को रेलवे ट्रैक को दोगुना करने के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा दी गई मंजूरी को रद्द करने के लगभग चार महीने बाद उठाया गया है।
परियोजना का शीर्षक 'उत्तर पश्चिमी घाट में टीनाघाट से कुलेम तक रेलवे ट्रैक के प्रस्तावित दोहरीकरण के कारण वन्यजीव आवास और पारिस्थितिक मूल्यों पर संचयी पर्यावरण प्रभाव आकलन' है।
तैयारी शुरू
मूल्यांकन के लिए डब्लूआइआइ ने एक सितंबर को एक विज्ञापन जारी कर विभिन्न पदों के लिए आवेदकों को आमंत्रित किया, जिसमें प्रोजेक्ट वैज्ञानिक, लैब असिस्टेंट, प्रोजेक्ट एसोसिएट आदि शामिल हैं। प्रस्तावित रेलवे लाइन गोवा में भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य में संरक्षित क्षेत्र के 120.8 हेक्टेयर और कर्नाटक के डांडेली वन्यजीव अभयारण्य में 10.4 हेक्टेयर से गुजरेगी।
गंभीर बाधा होगी
सुप्रीम कोर्ट ने एक केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीइसी) की सिफारिश के आधार पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया था कि रेलवे लाइन बाघ और हाथी जैसे जानवरों की आवाजाही के लिए एक गंभीर बाधा होगी। हालांकि, अदालत ने दक्षिण पश्चिम रेलवे को संरक्षित क्षेत्रों की जैव विविधता और पारिस्थितिकी पर परियोजना के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करने और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थाई समिति को एक नया प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति दी।
आकलन के बिना मंजूरी देने का आरोप
शीर्ष अदालत ने सितंबर 2020 में एक केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीइसी) नियुक्त की थी, जब गैर सरकारी संस्था गोवा फाउंडेशन ने एक याचिका दायर कर परियोजना को रद्द करने की मांग की थी। संस्था ने कई आपत्तियां उठाई थीं, जिसमें कहा गया था कि इस परियोजना से अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान को और नष्ट कर दिया जाएगा। बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया जाएगा और संरक्षित क्षेत्र की अखंडता प्रभावित होगी। संस्था ने सीइसी के समक्ष यह भी तर्क दिया था कि परियोजना को मंजूरी देने से पहले वन्यजीवों के आवास और जैव विविधता पर उचित प्रभाव का आकलन कभी नहीं किया गया था। प्रस्तावित रेलवे दोहरीकरण लाइन एक मौजूदा रेलवे लाइन के समानांतर है, जो उसी गलियारे के साथ एक ही जंगल से होकर गुजरती है।
प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका
प्रस्तावित परियोजना बाघ गलियारे को विभाजित करता है, जो कर्नाटक में काली टाइगर रिजर्व को महाराष्ट्र में सह्याद्री टाइगर रिजर्व से जोड़ता है और कर्नाटक, गोवा एवं महाराष्ट्र राज्यों में बाघ संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका है।
- गिरिधर कुलकर्णी, वन्यजीव विशेषज्ञ
Published on:
16 Sept 2022 08:29 am
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