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कटोरे में देखा तो मां की आंखें पथराई हैं, दो महीने की बेटी पिता के दर्शन करने आई है -कवि मुकेश मोलवा

कवि सम्मेलन : भोर तक जमे रहे काव्य रसिक श्रोता, कोटडा गांव में बही काव्य की सरिता

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कटोरे में देखा तो मां की आंखें पथराई हैं, दो महीने की बेटी पिता के दर्शन करने आई है -कवि मुकेश मोलवा

कटोरे में देखा तो मां की आंखें पथराई हैं, दो महीने की बेटी पिता के दर्शन करने आई है -कवि मुकेश मोलवा

बांसवाड़ा. सरदार पटेल की जयंती के मौके पर कोटड़ा गांव में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नवयुवक मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस कवि सम्मेलन में हास्य, वीर, श्रंगार और व्यंग्य के कवियों ने अपने रस के अनुसार ही काव्य पाठ कर श्रोताओं को भोर तक बांधे रखा। कवियों के व्यंग्यात्मक शब्द बाणों पर खूब तालियां बजी। पुलवामा हमले पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए अग्निधर्मा कवि मुकेश मोलवा ने ‘कटोरे में देखा तो मां की आंखें पथराई हैं, दो महीने की बेटी पिता के दर्शन करने आई है’ पंक्तियां पढ़ी तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा और भारत माता की जय के साथ शहीदों को सम्मान दिया। मोलवा ने साड़ी का कहा था रे पगले ! तिरंगा लेके आ गया.. जैसी मर्मस्पर्शी पंक्ति पर देर तक तालियां बजी। कवि मुकेश मौलवा ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, शहीद भगतसिंह, वीर शिवाजी के साथ ही महाराणा प्रताप का स्मरण करते हुए निष्ठावान अश्व चेतक को भी आदरांजलि दी। कहां कुरुक्षेत्र की रणभूमि में ज्यों पांचजन्य गूंजित हो जाता था, वैसी ही ध्वनि होती थी जब हल्दीघाटी में चेतक हिनहिनाता था...। जयपुर से आए युवा राष्ट्रवादी कवि राहुल शर्मा ने भारत माता की जय... वन्दे मातरम्..और जयश्री राम केन्द्रित काव्यपाठ करते हुए प्रासंगिक शौर्य गाथाओं पर सस्वर वीर रस की सभा को सर्वाधिक ऊंचाइयां दी। प्रतापगढ़ से आए पैरोडीकार शैलेन्द्र शैलू ने तरन्नुमी अंदाज़ में योगासन का प्रभाव, नोटबंदी ,नशे के दुष्प्रभाव, मजनू की पिटाई, नलों में पानी की किल्लत जैसे अनेकानेक विषयों पर हास्य व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों से रसिक श्रोताओं को गुदगुदाया। उज्जैन से आई कवयित्री निशा पंडित ने मन को सोने के जैसा खरा कीजिए, मन मरुस्थल को थोड़ा हरा कीजिए..जैसा आह्वान करते हुए गीत प्रस्तुत किए। वरिष्ठ कवि हरीश आचार्य ने जब तक यह देश है हम भी हैं ,जब देश नहीं तो हम भी नहीं, जो देश की ख़ातिर जिए-मरे बंदा वो अमर हो जाता है.. जैसी भावना के साथ ही वागड़ी गज़़लें भी प्रस्तुत की। संयोजक कवि अरविन्द पाटीदार ने हास्य व्यंग्य से भरपूर माहौल में दहेज प्रथा, नारी भ्रूणहत्या और राजनीतिक विसंगतियों पर प्रहार किया। फलौज डंूगरपुर से आए कवि गोपाल सेवक ने जीवन वतन के नाम होना चाहिए..., कवि प्रवीणसिंह वाघेला ने इतिहास के पन्नों को न फाड़ के फैंको... और आशीष एकलव्य ने देश की अखण्ड तस्वीर लौहपुरुष सी जवानी चाहिए...जैसी प्रस्तुतियां दी। गोविंद पाटीदार ने आभार ज्ञापित किया और कृष्ण लाल पाटीदार ने स्वागत उदबोधन किया। शुभारंभ में पंचायत समिति अरथूना के ब्लॉक कॉर्डिनेटर मोहित पाटीदार एवं साथियों ने कवियों का स्वागत-अभिनंदन किया और सरदार पटेल के बारे में बताया।


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