
Mahendrajeet Singh Malviya (Patrika Photo)
Rajasthan Politics: आदिवासी नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीया को 23 महीने पहले भाजपा में लाने का न तो पार्टी को कोई फायदा हुआ, न मालवीया के लिए सही निर्णय साबित हुआ। उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस को 41.40 प्रतिशत मतों का बड़ा नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई उनके लिए घरवापसी के बाद और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगी।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में महेन्द्रजीत सिंह को जीत मिली, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में मालवीया को और उसी साल बागीदौरा सीट पर उपचुनाव में उनकी पसंद से खड़े किए भाजपा प्रत्याशी सुभाष तम्बोलिया को जीत नसीब नहीं हुई।
बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में वर्ष 2024 के चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया था कि व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव और पार्टी बदलने का निर्णय हमेशा मतों में रूपांतरित नहीं हो पाता।
कांग्रेस के कद्दावर नेता और तत्कालीन बागीदौरा विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीया ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा, लेकिन यह कदम न तो उन्हें जीत दिला सका और न ही भाजपा को निर्णायक लाभ पहुंचा सका।
महेन्द्रजीत सिंह मालवीया ने 2023 का विधानसभा चुनाव बागीदौरा सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था और 45.65 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) दूसरे और भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मालवीया ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन की और बांसवाड़ा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बने। मालवीया के लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण बागीदौरा विधानसभा सीट खाली हुई, जिस पर 26 अप्रेल, 2024 को उपचुनाव हुआ था।
बागीदौरा में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का मतप्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन जीत तय नहीं कर सका। सबसे ज्यादा वोट बीएपी के पक्ष में स्विंग हुए। पार्टी 27 से 58 प्रतिशत तक पहुंच गई।
Updated on:
17 Jan 2026 12:40 pm
Published on:
16 Jan 2026 01:54 pm
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