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Banswara. सात फेरों ओर सात वचनों के साथ बने जीवनसाथी

बांसवाड़ा.परतापुर. सुसज्जित पाण्ड़ाल में सखियों से घीरी दूल्हनें और इनके ठहाकों एवं कानाफुसी की गूंज, मंत्रोच्चार के बीच मंगल गीत गाती महिलाएं, नाचते बाराती, 16 श्रृंगार एवं हाथों में मेहंदी सजाएं अपने प्रियवर को निहारती दूल्हनें, प्रेम पुष्प की माला लिए दाम्पत्य सुत्र में बंधने को आतूर दुल्हा। ऐसा ही कुछ नजारा था शुक्रवार को ज्वाला माता मंदिर परिसर में आयोजित बांसवाड़ा जिला नाई समाज के पहले सामूहिक विवाह का।

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Banswara. सात फेरों ओर सात वचनों के साथ बने जीवनसाथी

Banswara. सात फेरों ओर सात वचनों के साथ बने जीवनसाथी

बांसवाड़ा.परतापुर. सुसज्जित पाण्ड़ाल में सखियों से घीरी दूल्हनें और इनके ठहाकों एवं कानाफुसी की गूंज, मंत्रोच्चार के बीच मंगल गीत गाती महिलाएं, नाचते बाराती, 16 श्रृंगार एवं हाथों में मेहंदी सजाएं अपने प्रियवर को निहारती दूल्हनें, प्रेम पुष्प की माला लिए दाम्पत्य सुत्र में बंधने को आतूर दुल्हा। ऐसा ही कुछ नजारा था शुक्रवार को ज्वाला माता मंदिर परिसर में आयोजित बांसवाड़ा जिला नाई समाज के पहले सामूहिक विवाह का। जिसमें आचार्य मनोहरलाल सरेड़ी बड़ी के निर्देशन में अग्नि को साक्षी मानकर एवं सात जन्मों तक साथ निभाने के वचन के साथ 23 जोड़े जीवन साथी बने। जिसमें समाज के परतापुर, पालोदा, आंजना एवं पतोक चौखलों के हजारों समाजजन साक्षी बनें।
गाजे-बाजे के साथ
निकली बिनौली
स्थानीय सुभाषचन्द्र बोस स्टेडिय़म परतापुर से सभी दुल्हों को घोड़ो पर एवं दूल्हनों को बग्घी में सवार कर गाजे-बाजे के साथ एक विशाल बिनौली निकाली गई। जिसमें वर-वधू पक्ष के रिश्तेदारों सहित समाजजन शामिल हुए। बिनौली गांधी आश्रम, पुराना बस स्टैण्ड, बेड़वा बस स्टैण्ड, आशापुरा मोड़ होती हुई विवाह स्थल ज्वाला माता मंदिर पहुंची। इस दौरान परिजन एवं समाजजन नृत्य कर रहे थे। मंगल गीतों एवं पुष्पवर्षा के बीच दुल्हों ने तोरण की रस्म अदा की। इसके बाद विशाल पाण्ड़ाल में बने अलग-अलग खण्ड़ों में दुल्हा-दूल्हनों के परिजनों द्वारा ग्रहशांति, मण्ड़प, फेरो आदि की रस्म अदा की गई। समाज की ओर से कन्यादान किया गया।
समाजजनों ने नव विवाहितों को बधाईयां और आशीर्वाद भी दिया। शाम को विवाई के दौरान परिजनों के अलावा उपस्थित समाजजनों की आंखें भर आई। बग्धी में सवार एक दूल्हन ने इस यादगार लम्हें को सेल्फी लेकर मोबाईल में कैद किया। वहीं परिजनों को ढोल की थाप पर नाचते देख खूद को नही रोक पाई और बग्घी में बैठे-बैठे ही नाचने लगी। बिनौली में समाज की ओर से ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई।
इन्होनें ने दी भेंट, किया कन्यादान
इस मौके पर सभी जोड़ों को मेवाड़ा कलाल समाज जिलाध्यक्ष हरीश कलाल सेनावासा द्वारा कम्बल, प्रकाश नाई डडूका द्वारा हेलमेट एवं राजेंद्र नाई खेड़ा द्वारा चांदी के सिक्के भेंट कर आशीर्वाद दिया गया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष भानूदत्त बिछावाड़ा, सोलह चौखला अध्यक्ष जवाहरलाल भीलूडा, जिला संयोजक महेश रैयाना, अध्यक्ष नारायण खेड़ा, हरीश आंबापुरा, जीवनलाल पादेडी, शंकरलाल घाटोल, सह कोषाध्यक्ष महेश आंजना, सचिव राजेंद्र बांसवाड़ा, सह सचिव मनीष रैयाना, हार्दिक परतापुर, किशनलाल, सचिन, हितेश सहित हजारों समाजजन उपस्थित थे।


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