बांसवाड़ा. ख़ानकाह सभागार में रविवार को बज्मे सूफी कल्चर के तत्वावधान में आयोजित सूफियाना संध्या में सुर, लय और ताल के साथ मानव सेवा भी प्रभु सेवा का ही रूप है, जैसे संदेशपरक क़लाम गुजायमान रहे।
यह कैसी मोहब्बत है कैसी वफा, रहो सामने और दिखाई न दो
सूफियाना संध्या में सुर, लय, ताल के साथ गुंजायमान रहे संदेशपरक कलाम
बांसवाड़ा. ख़ानकाह सभागार में रविवार को बज्मे सूफी कल्चर के तत्वावधान में आयोजित सूफियाना संध्या में सुर, लय और ताल के साथ
मानव सेवा भी प्रभु सेवा का ही रूप है, जैसे संदेशपरक क़लाम गुजायमान रहे।
रामपुर उत्तरप्रदेश से आए सूफिय़ाना कव्वाल राजा सरफराज़ व साथियों ने शायर सूफी बिस्मिल नक़्शबन्दी के चिंतनपरक नग़मों को बहुत ही संजीदगी से प्रस्तुत किया। कभी परीक्षा न लेना दाता के हम परीक्षा न दे सकेंगे। न हम ऋषि हैं न हम मुनि हैं न सत्यवादी रसूल हैं हम...जैसे विनम्र आह्वान के साथ ही यह कैसी मोहब्बत है, कैसी वफा, रहो सामने और दिखाई न दो। यहां कोई भी साहिबेदिल नहीं है, यहां अपने हक़ में सफाई न दो...। जैसे प्रेममूलक मानवीय रिश्तों को यथार्थवादी उलाहने भरे स्वर प्रदान किए। साकार हो या निराकार परमतत्व को किसी भी नाम से पुकारा जा सकता है, तुम दीनदयाल हो मनमोहन या ख्वाजा मुइनुद्दीन हसन..., जैसे सदभाव भी प्रकट किए। शुभारंभ में बज़्मे सूफ़ी कल्चर संयोजक सिराज नूर चिश्ती, वरिष्ठ साहित्यकार हरीश आचार्य एवं शायर एजाज़ अकमल ने प्रमुख कव्वाल राजा सरफऱाज़ एवं कलाकार साथियों का अभिनंदन एवं माल्यार्पण किया। अधिवक्ता अनिल जैन के मुख्य आतिथ्य, संस्कृतिकर्मी आदित्य काले की अध्यक्षता तथा शायर सईद रोशन और जहीर आतिश के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुए समारोह का संयोजन व संचालन शायर सिराज नूर चिश्ती ने किया। तबला समीर हुसैन, ढोलक रफी मोहम्मद, बेंजो पर इकबाल गनी तथा कोरस समूह में साहिल हुसैन, फहीम हुसैन, फैजान और वसीम एहमद ने संगत शिरकत की। शायर एज़ाज़ अकमल ने सभी का आभार जताया।