
तेरी मिट्टी में मिल जावां, गुल बन के मैं खिल जावां..
रविवार प्रात: सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी शहीद की पार्थिव देह को लेकर रोहनिया के लिए रवाना हुए। रतनपुर से राजस्थान सीमा में प्रवेश करने के बाद डूंगरपुर और बांसवाडा़ जिले के कस्बों और गांवों में शहीद को पुष्पांजलि अर्पित करने जन सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे मार्ग पर सड़क के दोनों छोर पर पैर रखने की जगह नहीं थी। युवा हाथों में तिरंगा लिए पार्थिव देह रखे वाहन के पीछे चल रहे थे। देशभक्ति के गीत और नारों से वातावरण गूंज उठा। वागड़ के लाल के शहीद होने पर समूचा अंचल रविवार को गमगीन रहा।चेहरों पर गर्व के भाव
रोहनिया में शहीद की पार्थिव देह पहुंचने से पहले हजारों आंखों अपने लाल की प्रतीक्षारत रहीं। चांदरवाड़ा से रोहनिया तक उमड़े जन समूह के चेहरों पर गर्व के भाव दिखाई पड़ रहे थे। अरथूना से शहीद की पार्थिव देह कांगलिया पहुंची तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों व भारत माता की जय, जब तक सूरज-चांद रहेगा, महेंद्रसिंह का नाम रहेगा और वंदे मातरम के नारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया। कांगलिया से चांदरवाड़ा पहुंचने पर सरपंच अनिल डामोर सहित युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों व जन प्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
हर आंख हुई नम
राणावत की पार्थिव देह के रोहनिया पहुंचते ही वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की आंख नम हो उठी। वहीं शहीद की वीरांगना पूनम कुंवर, पिता, भाई सहित सगे-संबंधियों के भी आंसू थम नहीं रहे थे। फूलों से सजे वाहन से जब पार्थिव देह को शहीद के घर के आंगन में उतारा तो परिजनों की रुलाई फूट पड़ी। इसके उपरांत सामाजिक रस्मों को पूर्ण किया गया। वहीं अंतिम संस्कार के समय बेटे की पार्थिव देह पर राजेंद्रसिंह फूट-फूट कर रोये। यह देख वहां उपस्थित अन्य लोग भी भावुक हो उठे।
फूलों से अटा मार्ग
प्रताप सर्कल से शहीद की अंतिम यात्रा अंत्येष्टि स्थल के लिए रवाना हुई तो पूरे मार्ग पर लोगों ने गर्व के साथ पुष्पवर्षा की। पूरा मार्ग फूलों से अट गया। अंत्येष्टि स्थल पर सिलीगुड़ी बटालियन से सब इंस्पेक्टर राजपाल सिंह एवं एसओ गांधीनगर गुजरात के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बीएसएफ अधिकारियों ने शहीद के पिता राजेंद्र सिंह राणावत को पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज प्रदान किया और कहा कि 15 अगस्त एवं 26 जनवरी को इस झंडे को सलामी के साथ फहराएं।
वीरांगना बोली - शहादत पर गर्व
इधर, पार्थिव देह रोहनिया पहुंचने से पहले लाल जोड़े में शहीद की वीरांगना पूनम कुंवर ने कहा कि उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है। दो बेटे हैं, जिन्हें बड़ा होने के बाद देश की सेवा के लिए भेजूंगी। वहीं उनके पिता राजेंद्रसिंह ने कहा कि बेटे से आखिरी बार छह जून को बात हुई थी। वहीं भाई भूपेंद्रसिंह ने कहा कि महेंद्रसिंह से गुरुवार को बात हुई थी। इसमें अपने बड़े बेटे के स्कूल में एडमिशन पर चर्चा हुई थी। 15 जुलाई तक आने के लिए कहा था। उसमें बचपन से देश सेवा का जज्बा था। बातचीत में वह कहता कि मौका मिला तो देश के लिए कुर्बान हो जाऊंगा। छोटे से गांव के बेटे ने यह कर दिखाया। हर बार कहता कि शहीद हो गया तो लाखों लोग सेल्यूट करेंगे। आज यह महसू कर रहा हूं।
इन्होंने अर्पित की श्रद्धांजलि
शहीद को जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया, जिला प्रमुख रेशम मालवीया, जिला कलक्टर प्रकाशचन्द्र शर्मा, एसपी राजेश कुमार मीना, उपखंड अधिकारी सीएल शर्मा, तहसीलदार श्यामसिंह चारण, उपाधीक्षक रामगोपाल बसवाल, थानाधिकारी दिलीपसिंह चारण, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा अध्यक्ष अशोक सिंह मेतवाला, श्री राजपूत करणी सेना प्रदेश अध्यक्ष भंवरसिंह सलाडिय़ा, जिलाध्यक्ष महेंद्रसिंह भुवासा, हरिहर सिंह चौहान, रघुवीरसिंह चौहान, भाजपा नेता महेंद्र कुमार पटेल, नागेंद्र सिंह राठौड़, कृष्णा कटारा, हुसैन बोहरा, जोएब बोहरा सहित जनप्रतिनिधियों, समाजजनों और क्षेत्रवासियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। वहीं विभिन्न सशस्त्र बलों में कार्यरत वागड़ के विभिन्न गांवों के जवानों ने भी श्रद्धांजलि दी है।
मध्यरात्रि हुआ हादसा
बीएसएफ सब इंस्पेक्टर राजपाल सिंह ने बताया कि सिलीगुड़ी में वह महेंद्रसिंह के साथ ही थे। गुरुवार रात ड्यूटी के दौरान करीब 12 बजे तेज बारिश हो रही थी। तभी आकाशीय बिजली गिरी। इससे महेंद्रसिंह अचेत हो गए। साथी जवान उन्हें तत्काल समीप के अस्पताल लेकर गए, किंतु अस्पताल में चिकित्सकों ने महेंद्रसिंह को शहीद घोषित कर दिया।
Updated on:
20 Jun 2022 05:04 pm
Published on:
20 Jun 2022 04:59 pm
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