
बांसवाड़ा : सर्दी, गर्मी हो या बारिश, दस वर्षों से सतत रामायण पाठ
बांसवाड़ा. 'राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंत काल पछताएगा, जब प्राण जाऐंगे छूट...।Ó संसार रूपी महासागर को पार करने के लिए राम नाम की महिमा का बखान करने के लिए इन पंक्तियों से और कोई और श्रेष्ठ पंक्तियां नहीं हैं। इसी ध्येय को लेकर लोढ़ी काशी बांसवाड़ा के वनेश्वर मंदिर परिसर स्थित मानस भवन में विगत दस वर्षों से निरंतर रामायण पाठ किया जा रहा है। कड़ाके की सर्दी हो या आग उगलती गर्मी या मूसलाधार बारिश, बीते दस वर्षों में एक पल भी ऐसा नहीं बीता, जिसमें रामायण पाठ में कोई विघ्न आया हो या इसमें किसी प्रकार की कमी रही हो।
बांसवाड़ा में 26 मार्च 1989 को श्रीराम चरित मानस मण्डल की स्थापना हुई। 1952 में बांसवाड़ा आए संत विश्वम्भरदास फलाहारी महाराज के आशीर्वाद से 26 मार्च 2001 को मानस भवन की स्थापना हुई। इसके बाद 16 मार्च 2010 से अखण्ड रामायण पारायण मानस भवन में अनवरत चल रहा है।
3653 पाठ पूर्ण
मानस मंडल के अध्यक्ष महेश पंचाल ने बताया कि इस अखण्ड पारायण के अब तक 3653 पाठ पूर्ण कर लिए गए हैं। सोमवार को यह 11वें वर्ष में प्रवेश करेगा। रामायण पारायण का वाचन देवपाल मिश्रा, पूजा चौबीसा, केवला मिश्रा, गोवद्र्धन परमार, गिरीश जोशी, मनोहरलाल जैन, लक्ष्मीनारायण जोशी, शुभम मिश्रा आदि सदस्यों चौबीसों घण्टे किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंडल के 4175 आजीवन सदस्य हैं। इन पाठियों को मानस भवन की संचय राशि (आजीवन सदस्यता राशि) के ब्याज से मानदेय दिया जाता है।
एकल रूद्री पाठ भी
इसके अतिरिक्त 2001 से ऊं नम: शिवाय और राम नाम लेखन के लिए पुस्तिकाएं भी निशुल्क वितरित की जा रही हैं। जनवरी 2011 से यहां एकल विप्र की ओर से रूद्री पाठ किया जा रहा है। मंडल की गतिविधियों में मानस महिला मंडल की भी अहम भूमिका है। महिला मंडल की ओर से प्रति पखवाड़े सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, भजन आदि के आयोजन होते हैं। मंडल के वृहद कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता रहती है।
Published on:
16 Mar 2020 01:08 am
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