
गुरु पूर्णिमा पर आश्रमों में उमड़े भक्त : गुरु की महिमा अपरम्पार, चरणों में झुके शीश हजार
बांसवाड़ा. ‘गुरु मेरी पूजा, गुरु मेरा परब्रह्म..., गुरुवर दयालु तू तो बेड़ा पार उतारन है..., गुरु की महिमा न्यारी, मेरे गुरु बड़े, दुनिया छोटी है सारी...’ जैसे भक्ति गीतों की स्वर लहरियों के बीच आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। गुरु पीठों, धाम, मठों और देवालयों में सुबह से भक्तों की शुरू हुई रेलमपेल संध्याकाल तक बनी रही। श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन, गादी पूजन, चरण वंदन किए। वहीं कई श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा भी ली। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारे के आयोजन भी हुए।
दर्शन पाकर माना धन्य
रवीन्द्र ध्यान आश्रम स्थित उत्तम सेवा धाम पर गुरु पूर्णिमा पर्व पर हजारों श्रद्धालु उमड़े। सुबह से यहां श्रद्धालु और गुरुभक्त पहुंचना शुरू हो गए थे। प्रात: में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने ध्यानयोगी उत्तम स्वामी के चरणों में मत्था टेका। इसके बाद उत्तम स्वामी विशेष गैलेरी से होकर धाम परिसर में बनाए विशाल पाण्डाल में पहुंचे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवृष्टि की, वहीं जयकारे लगाकर समूचा वातावरण गुंजायमान कर दिया। यहां पादुका पूजन का लाभ प्रवीण सोनी कोटा ने लिया। पं. दिव्यभारत पंड्या के आचार्यत्व में रवि आचार्य और कीर्तेश भट्ट ने पादुका पूजन कराया। दोपहर में सामूहिक पूजन और दीक्षा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। वहीं भजनों की सरिता में भी श्रद्धालुओं ने गोते लगाए।
कलियुग में श्रेष्ठ दान ज्ञान का दान
प्रवचन में उत्तम स्वामी ने कहा कि गुरु समुद्र के समान है, जिस तरह समुद्र के स्नान मात्र से सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है उसी प्रकार गुरु के शरण प्राप्त करने से समस्त पापों का शमन हो जाता है। देश मंदिर से नहीं, मनुष्यशाला से श्रेष्ठ बन सकता है। कलियुग में श्रेष्ठ दान ज्ञान का दान है। भक्तों की ओर से दी जाने वाली सहयोग राशि से विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। नई और भावी पीढ़ी को संस्कारित और ज्ञानवान बनाने के इस महायज्ञ में श्रद्धालु अपनी आहुति दें। बच्चों को पढ़ाने से दस पीढिय़ां सुधर जाती हैंं।उनके जीवन का लक्ष्य यह है कि शिक्षा संबंधी कार्य अवश्य करते रहेंगे। जो शोषित, पीडि़त, दरिद्र और अभावों में जीवन यापन करने वाले बच्चे हंैं, उनमें ज्ञान का दीपक प्रज्वलित करने में भक्त भी रामसेतु के निर्माण में गिलहरी के समान अपनी भूमिका का निर्वहन करें। भक्तों की एक आहुति इन बच्चों के लिए संजीवनी सिद्ध होगी।
यह रहे मौजूद
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्रीवद्र्धन, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम अध्यक्ष तपन भौमिक, भारतीय किसान संघ के गजेंद्रसिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के अनुज नरेंद्रसिंह, राजस्थान वंशावली बोर्ड के महेंद्रसिंह राव, अमरावती के लिलेश विश्वकर्मा, मध्यप्रदेश अजा आयोग के अध्यक्ष भूपेंद्र आर्य, राजस्थान अजा आयोग के अध्यक्ष विवेक खोलिया, विधायक कन्हैयालाल चौधरी, भानुप्रताप, संसदीय सचिव शत्रुघ्न गौतम, केके गुप्ता आदि उपस्थित रहे। संचालन सतीश आचार्य ने किया।
भोर में गुरु पादुका पूजन
लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भोर में गुरु पादुका पूजन अनुष्ठान हुआ। इसमें लालीवाव पीठाधीश्वर महंत हरिओमशरणदास महाराज ने मठ के पूर्ववर्ती महंतों की छत्री, चरण पादुकाओं तथा मूर्तियों का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महंत नारायणदास की छतरी पर गुरु पादुका पूजन में मठ की शिष्य परम्परा के अनुयायियों और भक्तों ने हिस्सा लिया और गुरु पूजन किया। मठ में प्रात: 5 से दोपहर तक भारी भीड़ लगी रही। भक्तों ने महंत हरिओमशरणदास को पुष्पहार पहनाकर पूजन किया तथा आशीर्वाद लिया। प्रात: 5 से 11 गुरुगादी पूजन एवं दोपहर 12 से 1 बजे दीक्षा महोत्सव हुआ।
इसके बाद चन्द्रग्रहण सूतक के कारण दोपहर 2 बजे मंदिर के पट बंद करदिए एवं महोत्सव का समापन किया गया। इससे पहले नव दीक्षार्थियों ने दीक्षा विधान के साथ लालीवाव महंत से दीक्षा प्राप्त की और नव जीवन का संकल्प ग्रहण किया। तीन घण्टे चले दीक्षा महोत्सव में दीक्षार्थियों का तांता बंधा रहा। शिष्यों ने पीठाधीश्वर की आरती उतारी और आशीर्वाद लिया। दोपहर तक लालीवाव धाम पर भजन-कीर्तनों की धूम बनी रही। लालीवाव धाम के प्रधान मन्दिर पद्मनाभ में भगवान के श्रीविग्रहों का मनोहारी श्रृंगार किया गया। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। दोपहर 2 बजे महाआरती तक भण्डारे में हजारों लोगों ने महाप्रसादी ग्रहण की।
आत्म कल्याण के लिए सद्गुरु आवश्यक
महंत ने प्रवनच में कहा कि गुरु मंत्र में अद्भुत शक्ति होती है। साधक को नित्य जाप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप विशेष पर्वों पर वर्ष में आठ बार किया जाए तो मंत्र सिद्ध हो जाता है और जीवन में सुख समृद्धि के साथ आत्म शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि गु यानी अधंकार और रु यानी प्रकाश। अर्थात जो अंधकार में प्रकाश प्रदान करे, वह गुरु है।
राष्ट्र को सर्वोपरि मानें
महंत ने कहा कि राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर कार्य करें। समाज-जीवन के जिस किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हों, वहां देशभक्ति और देश के विकास की भावना को सामने रखकर दिव्य जीवन व्यवहार के साथ कार्य करें। ईश्वर द्वारा प्रदत्त क्षमताओं का भरपूर उपयोग मानवता के हित में और मनुष्य जीवन के चरम लक्ष्य की प्राप्ति में करें। महाभारत, ब्रह्मसूत्र, श्रीमद् भागवत आदि के रचयिता महापुरुष वेदव्यास के ज्ञान का मनुष्य मात्र लाभ ले।
सीएम ने लिया आशीर्वाद
इससे पहले मुख्यमंत्री ने भी मोबाइल कॉल कर उत्तम स्वामी का आशीर्वाद लिया और श्रद्धालुओं को भी कुछ देर संबोधित किया। वहीं उत्तम स्वामी ने श्रद्धालुओं को जानकारी दी कि श्रावण व भाद्रपद में आश्रम में भागवत कथा का नियमित वाचन होगा। श्रावण में पार्थिवेश्वर शिवलिंग का निर्माण होगा। शरद पूर्णिमा पर तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न प्रांतों और विदेश में होने वाली भागवत कथा व जन्माष्टमी के कार्यक्रम की जानकारी दी।
Published on:
28 Jul 2018 02:49 pm
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