वरुण भट्ट/ राकेश शर्मा. बांसवाड़ा (गांगड़तलाई). जिले की जीवनदायिनी माही के जर्जर नहरी तंत्र के साथ ही एक सच यह भी हैं कि आज भी कई क्षेत्र पानी से वंचित है। समझौते के अनुसार गुजरात तक पहुंच रहे पानी एवं भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों तक माही का पानी पहुंचाने की चलती चर्चाओं के बीच बड़ा सवाल यह भी है कि जिले के वंचित क्षेत्रों तक माही की जलधार नहरी तंत्र से कब पहुंचेगी। राजस्थान पत्रिका ने सज्जनगढ़-गांगड़तलाई क्षेत्र में पड़ताल की तो किसानों का दर्द सामने आया। यहां खेतों तक अनास नदी का पानी पहुंचाने के लिए जुगाड़ किया जा रहा है। ये पानी भी वे ही किसान इस्तमाल कर पा रहे है, जिनके खेत नदी के नजदीक है। अधिकांश तो अब भी सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे है। गांगड़तलाई पंचायत समिति के धुलियागढ़ गांव व सज्जनगढ़ पंचायत समिति के महुड़ी गंाव के मध्य अनास नदी के पानी के लिए नजदीकी खेतों के काश्तकारों ने मोटर लगाकर पाइप का जुगाड़ कर रखा है। पाइप भी सडक़ के उपर से तोरण की तरह नदी से खेतों तक जा रहा है। जो इस बात का प्रमाण है कि सिंचाई पानी के लिए किसान काफी मशक्कत कर रहे है। जिले में माही के पानी के उपयोग के आंकड़ों पर नजर डाले तो 80 हजार हैक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। अब भी इससे दुगनी जमीन पानी को तरस रही है। जहां तक पानी पहुंचाने की दरकार है।
कई तरह के जुगाड़ करते है
महुडी गंाव के तौलसिंग ताबियार का कहना है कि नहरों की व्यवस्था नहीं होने से हर वर्ष सिंचाई में दिक्कत आती थी। इस बार अनास नदी के पानी का खेती में उपयोग करने पहले थ्री फेज लाइन का कनेक्शन लिया एवं इसके बाद नदी पेटे में मोटर के माध्यम से पाइप लाइन से खेतों तक पहुंचाने का जुगाड़ किया है।
नहरी तंत्र के हो प्रयास
धुलियागढ़ के किसान रमेश भाई बताते है कि क्षेत्र में सिंचाई के पानी की समस्या है। बोरिंग से ही सिंचाई के पानी के जैसे-तैसे इंतजामात करते है। खेती के लिए पर्याप्त जमीन के बावजूद अधिकांश लोग खेती भी पानी के अभाव में नहीं कर पा रहे है। नहरी तंत्र को लेकर सरकार को प्रयास करने चाहिए।
पलायन भी बढ़ता है.
किसान सुरेंद्र कुमार बताते है कि सिंचाई के लिए पानी की ज्यादा समस्या है। बोरिंग कराने पर भी पानी कई बार उपलब्ध ही नहीं होता है। अनास नदी एवं कूप से जैसे-तैसे व्यवस्था करनी पड़ती है। माही का पानी पहुंचाने के लिए नहरी तंत्र को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिले। खेती नहीं होना भी पलायन का एक कारण है।
ये है स्थिति –
80 हजार हैक्टेयर में सिंचाई सुविधा
– करीब डेढ़ लाख हैक्टेयर जमीन अब भी सिंचाई से दूर
– सज्जनगढ़, कुशलगढ़, गांगड़तलाई, छोटी सरवन दानपुर आदि क्षेत्र प्रभावित।
– किसानों के पास जमीन है, लेकिन सिंचाई के लिए पानी नहीं उपलब्ध।
– अन्य राज्यों में पलायन