गनोड़ा.बांसवाड़ा. मानूसन सीजन में जिलेवासियों की चाह माही बांध के पूरा भरने और इसके गेट खुलने पर निकलती अपार जलराशि को देखने की होती है। प्रतिवर्ष यह चाह पूरी होती है। शनिवार को भी सीजन में पहली बार माही बांध के गेट खोले गए, किंतु लगातार बारिश और माही का पानी समीपस्थ गांव कराना व भाऊ का गढ़ा के किसानों के लिए मुसीबत बनकर आया। दोनों गांवों में सैकड़ों बीघा भूमि जलमग्न हो गई और खेतों में खड़ी फसल चौपट हो गई।
लगातार बारिश और माही बांध से जलप्रवाह होने पर गनोड़ा तहसील के कई गांव प्रभावित होते हैं। कहीं एक गांव को दूसरे से जोड़ने वाली पुलियाओं पर पानी बहने से संपर्क कट जाता है और आवागमन बाधित होता है तो कहीं अत्याधिक मात्रा में पानी घरों और खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाता है। ऐसा ही शनिवार को माही बांध के गेट खोले जाने और लगातार बारिश से गनोड़ा तहसील की ग्राम पंचायत बिछावाडा के कराना व भाऊ का गढ़ा में सामने आया। यहां के किसानों के लिए बरसात मानो बैरन बनकर आई। यहां कई किसानों की सैकड़ों बीघा भूमि पर खड़ी फसलें चौपट हो गई।
आहत पर आहत
गत अगस्त माह में बरसात का दौर थमने पर फसल सूखने के कगार पर थी। किसानों ने नदियों का पानी मोटर के माध्यम से खेतों तक लाकर सिंचाई का प्रयास किया था। इसके बाद सितंबर में मानसून पुन: सक्रिय होने पर कुछ राहत मिली ही थी कि गत तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश ने खेत जलमग्न कर दिए। चारों ओर पानी ही पानी हो गया। खेतों में किसानों के मोटर व अन्य कृषि यंत्र भी पानी के साथ बह गए।
नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
बारिश से दोनों गांवों में पहुंचने की पुलिया पर पानी बहने से मार्ग बाधित है। इस कारण किसानों को हुए लाखों के नुकसान के बाद भी कोई अधिकारी नहीं पहुंच पाया है। सरपंच मंजुला कटारा देवी ने बताया कि दोनों गांवों में किसानों की हजारों बीघा भूमि में फसल बर्बाद हो गई है। उन्हें बड़ा नुकसान हुआ है। प्रशासन इसकी गिरदावरी कराकर पर्याप्त मुआवजा व फसल बीमा का लाभ दिलाए।