अक्टूबर में हुई बारिश से उड़द की फ़सल को सर्वाधिक नुकसान, मक्का और सोयाबीन की फसल भी हुई प्रभावित
बांसवाड़ा. जिले में अक्टूबर माह में हुई बेमौसम की बारिश ने खरीफ फसल के लिए की गई किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इस बारिश के कारण जिले में सबसे अधिक उड़द की फसल को नुकसान पहुंचा है। कुछ इलाकों में सोयाबीन की आधे से अधिक फसल को क्षति पहुंची है, वहीं मक्का की फसल भी प्रभावित हुई है।
बांसवाड़ा में मानसून जून से सितंबर की अवधि तक माना जाता रहा है। जिले में किसान इस खरीफ सीजन में सबसे अधिक मक्का, सोयाबीन की बुवाई करते हैं। साथ ही उड़द व धान की फसल भी करते हैं। इस वर्ष नियमित अंतराल पर बारिश का दौर चला, किंतु कई क्षेत्रों में आरंभ में ही बुवाई करने वाले किसानों को समय पर पानी नहीं मिलने से दोबारा बुवाई करने जैसी िस्थति भी बनी। इसके बाद भी बरसात पर निर्भर खरीफ फसल में कम ही नुकसान का अंदेशा था, किंतु मानसून समाप्त होने के एक सप्ताह बाद तीन दिन हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर ही पानी फेर दिया। जितनी उपज की उम्मीद थी, उससे कहीं अधिक खराब हो गई।
50 से 90 प्रतिशत नुकसान
कृषि विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले की सभी 11 तहसील क्षेत्रों में किसानों ने 213512 हैक्टेयर में मक्का, सोयाबीन, धान, अरहर, उड़द व अन्य फसलों की बुवाई की थी। इसमें करीब छह हजार 848 हैक्टेयर में उड़द बाेया था। विभागीय सर्वे के अनुसार जिले के सभी क्षेत्रों में उड़द की फसल को छह से आठ अक्टूबर के बीच हुई बारिश से 50 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक 90 प्रतिशत नुकसान सज्जनगढ़ क्षेत्र में हुआ है। वहीं बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़ इलाके में सोयाबीन की फसल का खराबा हुआ है। अरथूना, सज्जनगढ़ व कुशलगढ़ इलाके में मक्का की फसल करीब 40 प्रतिशत खराब हुई है।
खरीफ में बुवाई
213512 हैक्टेयर में कुल बुवाई
108482 हैक्टेयर में मक्का
64477 हैक्टेयर में सोयाबीन
25840 हैक्टेयर में धान
6848 हैक्टेयर में उड़द
4330 हैक्टेयर में अरहर
3535 में अन्य फसल