
Video: Banswara: young man giving lesson to save food
काकी आ हूं करो... । अरे-अरे भाई साहब जूठन मत फेंको, लाओ मुझे दो...। न न बेटा, ये अन्न है थाली में छोड़कर बर्बाद नहीं किया जाता है। कुछ एेसे ही बोल सुनाई पड़ रहे थे त्रिपुरा सुंदरी में आयोजित स्वर्ण शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान भोजनशाला में। जहां कई युवाओं की टीम लोगों से अन्न बर्बाद न करने की विनती के साथ इंसानियत का पाठ भी पढ़ा रही थी।
एक जैसे शब्द, एक जैसी वेशभूषा
महोत्सव के लिए तैयार की गई भोजनशाला में 300 से 400 युवा एक जैसे वस्त्रों में में थे और उनका पैगाम भी एक समान था। वे भोजन करने वाले सभी श्रद्धालुओं से हाथ जोड़ विनती कर रहे थे कि जूठन के रूप में भोजन को बर्बाद न करें। ताकि कुछ और भूखे लोगों के उपयोग में आ सके। अपनी इस सीख के साथ स्वच्छता अभियान का भी पैगाम दे रहे थे।
एेसे शुरू हुआ क्रम
पंचाल समाज तरपोट चोखरा के युवाओं के द्वारा जूठन न फेंकने की पहल को लेकर चोखला के युवकों ने बताया कि एक समारोह में कुछ लोगों अन्न बर्बाद करते देखा था। बस वहीं, से विचार आया कि शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव में अन्न बर्बाद नहीं होने देंगे। इसके लिए चोखरे के सभी युवाओं ने अपना संगठन बनाया और जुट गए अन्न को मान देने के उद्देश्य में। कुछ लोगों से शुरू हुआ यह क्रम इस महोत्सव में वृहद रूप ले चुका है। यहां सैकड़ों युवा इस नेक कार्य में जुटे हैं।
6 दिनों तक रहेंगे मुस्तैद
युवाओं ने बताया कि वे सभी पूरे महोत्सव के दौरान लोगों को अन्न बर्बाद न करने की सीख देंगे। सुबह नाश्ते से लेकर देररात भोजन तक सैकड़ों लोगों से वे विनती करेंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि लोगों की थाली में बचा अन्न पानी में मिलकर पूर्णतया नष्ट हो जाता है।
जो सिवाय फेंकने के किसी काम नहीं आता। इसलिए समझाइश के बाद भी कोई थाली में अन्न बचा देता है तो उसे हम सभी इकट्ठा कर लेते हैं और इधर-उधर फेंकने की बजाय मवेशियों को खिला देते हैं। इससे मवेशी भी भूखे नहीं रहते, सफाई भी रहती है और अन्न का अपमान नहीं होता।
Published on:
09 May 2017 01:45 am
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