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Patrika Keynote: सूचनाएं नहीं तो जीवन अंधकारमय, निष्पक्षता ही सच्ची पत्रकारिता- अरुणा रॉय

सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राॅय ने कहा कि कर्पूरचंद कुलिश और पत्रिका से मेरा पुराना नाता है। जब गांव-ढाणी में कोई अखबार नहीं था, सिर पर घड़ा रखकर पानी लाना पड़ता था, तब पत्रिका प्रहरी के रूप में खड़ा मिलता था।

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पत्रिका-की नोट कार्यक्रम में मौजूद प्रधान संपादक गुलाब कोठारी, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और विधायक अनिता भदेल।

अजमेर। सूचना का अधिकार लोकतंत्र की जड़ है। सूचनाएं नहीं होंगी तो जीवन अंधकारमय होगा। किसी से पूछकर और उसकी सहमति से सूचना मांगनी पड़े तो यह पत्रकारिता के लिए बड़ी चुनौती है। चाहे कोई तकलीफ में रहे, लेकिन पारदर्शिता और निष्पक्षता सदैव बनी रहनी चाहिए।

यह बात मैग्सेसे अवार्ड विजेता और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश की जन्मशती शताब्दी वर्ष के तहत मंगलवार को मित्तल मॉल के होटल सरोवर पोर्टिको में आयोजित लोकतंत्र और मीडिया विषयक पत्रिका-की नोट कार्यक्रम में कही।

लोकतंत्र में सूचना की बहुत अहमियत

रॉय ने कहा कि लोकतंत्र में सूचना की बहुत अहमियत है। ब्यावर से शुरू हुई सूचना के अधिकार की लड़ाई कई संघर्षों के बाद कानून बनी। जनता के हक और लोकतंत्र की मजबूती के लिए अधिकार मांगना आसान नहीं था, लेकिन सूचना का अधिकार सबसे सशक्त कानून बना। इसने दुनिया को आश्चर्य चकित किया। लोकतंत्र और पत्रकारिता एक दूसरे के पूरक हैं। बदलते दौर में अब डिजिटल प्रोटेक्शन एक्ट रूल लाया गया है। इसमें किसी की व्यक्तिगत सहमति, अनुमति के बिना सूचना लेना संभव ही नहीं है। इससे लोकतंत्र के प्रति जवाबदेही कैसे होगी? जब ऐसा कानून होगा तो पत्रकारिता कैसे आगे बढ़ेगी। ऐसे में हमारी नैतिक भूमिका बहुत अहम है। पूर्व लोकायुक्त एसएस कोठारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

संस्कृति को बनाए रखने का दायित्व है पत्रकारिता : कोठारी

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने कहा कि संस्कृति को बनाए रखने का दायित्व पत्रकारिता है। पत्रकार और साधु सदैव समाज को देने वाले होते हैं। वह कुछ मांगते नहीं हैं। पत्रकारिता संवाद का क्षेत्र है। अभिव्यक्ति की इच्छा, मन, बुद्धि से नहीं आत्मा से होती है। संवाद आत्मा से होता है। उन्होंने कहा कि हमारी पढ़ाई का ध्येय पेट भरने और नौकरी तक सीमित हो गया है। कृत्रिम दौर में इंटेलीजेंस भी आर्टिफिशियल हो गई है। मीडिया का पेड़ बनने के लिए जमीन में गड़ना होगा। बीज जमीन में नहीं होगा तो अच्छा पेड़ कभी नहीं बन सकता है।

'पत्रिका प्रहरी के रूप में खड़ा रहा है'

सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राॅय ने कहा कि कर्पूरचंद कुलिश और पत्रिका से पुराना नाता है। जब गांव-ढाणी में कोई अखबार नहीं था, सिर पर घड़ा रखकर पानी लाना पड़ता था, तब पत्रिका प्रहरी के रूप में खड़ा मिलता था। सामाजिक सरोकारों और जनता से जुड़े आंदोलन में पत्रिका सदैव खड़ा रहा है।

विधायक भदेल ने कहा कि वह चौथी कक्षा से पत्रिका पढ़ रही हैं। खबरों में निष्पक्षता और स्पष्टवादिता इसका आधार है। कुलगुरु प्रो. सुरेश अग्रवाल ने भी पत्रिका के अमृतम जलम और अन्य सामाजिक अभियानों को जनजागरण का माध्यम बताया। पूर्व लोकायुक्त एस.एस. कोठारी ने कहा, राजस्थान पत्रकारिता मूल्य आधरित पत्रकारिता को आगे बढ़ा रहा है।

मीडिया का कार्य लोकतंत्र को परिष्कृत करना: भदेल

अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल ने कहा कि समाज में नेरेटिव गढ़े जाते हैं, लेकिन सामाजिक सरोकारों के प्रति हमें सजग होना चाहिए। मीडिया का कार्य लोकतंत्र को परिष्कृत करना है। इसमें निष्पक्षता और स्पष्टता बहुत आवश्यक है।

सूचना सिर्फ ज्ञान नहीं जीवन का दृष्टिकोण: प्रो. अग्रवाल

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.सुरेश अग्रवाल ने कहा कि सूचना सिर्फ ज्ञान नहीं जीवन का दृष्टिकोण है। मीडिया सत्ता के कार्यों का आकलन करते हुए चुनौती दे, पर समाज से विमुख नहीं होना चाहिए। ब्रेकिंग न्यूज के साथ पत्रकारिता का कर्त्तव्य राष्ट्र निर्माण के लिए होना चाहिए।

तथ्यों की जांच और विश्लेषण जरूरी: पूर्व लोकायुक्त कोठारी

पूर्व लोकायुक्त एस.एस.कोठारी ने कहा कि डिजिटल युग में सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान हो रहा है। लेकिन तथ्यों की जांच और विश्लेषण बहुत जरूरी है। मीडिया को खबरों के साथ सामाजिक परिवेश का सजग प्रहरी बनना चाहिए। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की निगरानी के दायित्व के साथ स्वस्थ लोकतंत्र के निर्माण की जिम्मेदारी भी है।

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