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जलवायु परिवर्तन के नुकसान से बचने के लिए विविधता वाली फसल जरूरी

Crop Diversification Climate Change Farming : प्रगतिशील किसान पद्मश्री राम सरन वर्मा लगभग 300 एकड़ में खेती करते हैं। वह सालाना 30 हजार लोगों को रोजगार भी देते हैं।

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बाराबंकी

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Avaneesh Kumar Mishra

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जयप्रकाश सिंह

Mar 18, 2026

प्रगतिशील किसान पद्मश्री राम सरन वर्मा फसल चक्र के बारे में बताते हुए, PC- Patrika

बाराबंकी : राजधानी से करीब 48 किलोमीटर दूर बाराबंकी जिले के जैदपुर के प्रगतिशील किसान पद्मश्री राम सरन वर्मा का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने खेती के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। समय से पहले गर्मी, अतिवृष्टि और बिगड़े मौसम जैसे प्राकृतिक बदलावों के कारण फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।

उन्होंने बताया कि हर साल बढ़ती गर्मी से कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसी स्थिति में फसल चक्र अपनाने और विविधता वाली खेती करने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वे अपने गांव के फार्म हाउस पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

वर्मा ने आधुनिक खेती और नवाचारों के जरिए देशभर में अपनी पहचान बनाई है। वे करीब 300 एकड़ क्षेत्र में अनाज, सब्जियां, फल और पशुपालन के साथ आधुनिक खेती कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए वर्ष 2019 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से पद्मश्री सम्मान दिया गया।

आधुनिक खेती जरूरी

वर्मा का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी खेती से दूरी बना रही है। उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। केवल अनाज की खेती से आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बना जा सकता, इसके लिए फल-सब्जियों जैसी फसलों को भी अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि फसल बोने से पहले मिट्टी और जलवायु का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत योगदान इन्हीं कारकों का होता है।

30 हजार लोगों को रोजगार

वर्मा हर साल अपने खेतों के माध्यम से करीब 30 हजार लोगों को रोजगार दे रहे हैं। साथ ही वे लाखों किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों का निःशुल्क प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। इससे उनके गांव और आसपास के क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां किसान प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपए तक का मुनाफा कमाते थे, वहीं अब यह बढ़कर डेढ़ से दो लाख रुपए तक पहुंच गया है।

सहारा विधि से टमाटर की खेती

वर्मा और क्षेत्र के किसान सहारा विधि से टमाटर की खेती कर रहे हैं। इसमें पौधों को तार और रस्सियों के सहारे खड़ा किया जाता है, जिससे वे जमीन पर नहीं फैलते। इससे टमाटर की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। पहले जहां एक एकड़ में 200 क्विंटल उत्पादन होता था, अब यह बढ़कर 400 क्विंटल तक पहुंच गया है। इसी तरह टिश्यू कल्चर के जरिए केले की खेती को भी बढ़ावा दिया गया है, जिसकी मांग प्रदेश सहित देश के कई शहरों में है।

गांव में पहुंचा बाजार

यूपी के पूर्व कृषि सचिव और सेवानिवृत्त आइएएस अमित मोहन प्रसाद के अनुसार, वर्मा ने किसानों की सोच और जीवनशैली में बड़ा बदलाव किया है। पहले किसानों को बाजार नहीं मिलता था और वे टमाटर सड़कों पर फेंकने को मजबूर होते थे। अब कंपनियां और व्यापारी सीधे खेतों तक पहुंचकर फल-सब्जियां खरीद रहे हैं। इससे गांव तक बाजार पहुंच गया है।