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नीम हकीम खतरा ए जान ,चिकित्सा तंत्र की उड़ रही धज्जियां , एक कमरे में पूरा अस्पताल
किशनगंज. धर्मिक एवं पर्यटन नगरी के नाम से प्रख्यात रामगढ आदिवासी बाहुल्य वाला इलाका होने के बावजूद यहां चिकित्सा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं है। यहां के ज्यादातर लोग झोलाछाप बंगाली नीम हकीमों के भरोसे इलाज करा रहे है। सरकारी तन्त्र भी कुछ इस तरह मौन है कि जैसे यहां किसी को मजबूत चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता ही नहीं है। कई बार यहां उच्च अधिकारी दौरा करते हंै लेकिन क्षेत्र की नाकाफ ी चिकित्सा व्यवस्थाओं के सुधार को लेकर किसी प्रकार की कोशिश नहीं होती है। किशनगंज वह इलाका है जहां आज से लगभग 18 वर्ष पूर्व भूख से मौतें हुई थी। यहां कुपोषण भी अपनी जड़े जमाए हुए हैं। चिकित्सा व्यवस्थाएं भगवान भरोसे है।
रामगढ में एक कमरे में चलती है पीएचसी
रामगढ किशनगंज कस्बे से 30 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ स्थित है। रामगढ कस्बा बडा होने के साथ-साथ सहरिया बाहुल्य भी है। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एक छोटे भवन में संचालित है। इस पीएचसी के अन्तर्गत रामगढ, असनावर, पीपल्दाकला, ब्रजनगर ओर सेवनी ग्राम पंचायत के 5 सबसेन्टरों के करीब 6 0 गांव आते हंै। लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते यहां मरीज झोलाछाप बंगाली चिकित्सकों के भरोसे इलाज करवाकर जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। पीएचसी के इस भवन में जिस कक्ष में चिकित्सक मरीजों को देखते हैं उसी कक्ष में मरीजों का उपचार किया जाता है। हालात यह है कि यहां उसी कक्ष में ही पर्ची काउन्टर है ओर यही प्राथमिक उपचार भी किया जाता है।
प्रसूता के लिए हर वक्त खतरे की आहट
पीएचसी पर जिस कक्ष में प्रसव करवाया जाता है उसी कक्ष में प्रसव बाद नवजात व प्रसुता को भर्ती रखा जाता है। अन्य प्रसुता के प्रसव के लिए आने पर उसी कक्ष में प्रसव करवाया जाता है। जिससे नवजात व प्रसुता के लिए खतरे भरा होता है। यहां प्रसव भी एक एएनएम के भरोसे होता है। प्रसव कक्ष व भवन की साफ सफ ाई के लिए मात्र एक पुरूष सफ ाईकर्मी तैनात है। प्रसुताओं को लाने ले जाने के लिए यहां 104 एम्बुलेंस की व्यवस्था भी नही है। कई बार जटिल प्रसव की स्थिति में यहां से प्रसुता को किशनगंज रैफ र किया जाता है। लेकिन उसके लिए किशनगंज से 104 एम्बेलेंस के यहा पंहुचने को इन्तजार होता है। कई बार प्रसुता को परिजन ही अपने स्तर पर किशनगंज या बारां ले जाते हैं। 104 एम्बेलेंस के अभाव में आस पास के गांवों के लोग अपने साधनों से ही प्रसुताओं को लेकर यहां पंहुचते हंै।
यह रिक्त पदों की स्थिति
रामगढ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तीन चिकित्सकों एएनएम का एक पद रिक्त है। कुछ समय पहले ही यहां तैनात दो जीएनएम का स्थानान्तरण अन्य जगह हो गया। वर्तमान में यहां एक आयुष चिकित्सक है। जिसे कुछ दिन पहले निरीक्षण पर आए बीसीएमओ ने चिकित्साधिकारी का चार्ज सोंपा है। आयुष चिकित्सक के भरोसे ही चिकित्सा व्यवस्था चल रही है।
& सुविधा के हिसाब से व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हंै। रिक्त पदों को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है।
लेखराज मालव, ब्लॉक चिकित्साधिकारी किशनगंज
Published on:
24 Oct 2019 04:18 pm

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