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संविदा से हटाया तो टंकी पर चढ़े लैब टेक्नीशियन, रात में नीचे उतरे

बारां

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Mukesh Gaur

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Updated: 2 Feb 2026, 10:49 PM IST

एक दर्जन लैब टेक्नीशियन सोमवार दोपहर को पुरानी सिविल लाइन स्थित जलदाय विभाग की टंकी पर चढ़ गए और मांगों को लेकर लिखित आश्वासन नहीं देने पर कूदने की धमकी देने लगे।

बारां. पुरानी सिविल लाइंस स्थित टंकी पर चढ़े लैब टेक्नीशियन। पत्रिका

प्रदर्शन : मौके पर वार्ता से नहीं बनी बात, एडीएम आवास पर बनी सहमति

बारां. जिला अस्पताल में बरसों से संविदा पर सेवा दे रहे लैब टेक्नीशियन को हटाने के मामले को लेकर विवाद गहरा गया। करीब एक दर्जन लैब टेक्नीशियन सोमवार दोपहर को पुरानी सिविल लाइन स्थित जलदाय विभाग की टंकी पर चढ़ गए और मांगों को लेकर लिखित आश्वासन नहीं देने पर कूदने की धमकी देने लगे। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध प्रकट किया। सूचना पर मौके पर पहुंचे जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. नरेन्द्र कुमार, पुलिस उपाधीक्षक हरिराम सोनी व कोतवाली प्रभारी योगेश चौहान ने समझाइश की, लेकिन रात आठ सात बजे तक बात नहीं बनी।एडीएम आवास पर वार्ता में इनको समायोजित करने पर सहमति बनी। इसके बाद प्रदर्शनकारी रात 9 बजे टंकी से नीचे उतर आए।

एजेंसी बदलने से विवाद

संविदा लैब टेक्नीशियन का कहना था कि सरकार की ओर से एनएचएम के तहत राज्य के जिला अस्पताल से पीएचसी स्तर तक तीन स्तरीय सुविधा मदर-हब-स्पोक मॉडल के तहत लैब शुरू करने लिए एक एजेंसी को टैंडर दे दिया। जिला अस्पतालों में मदर लैब स्थापित की गई है 145 तरह की निशुल्क जांच का कार्य एक एजेंसी को दिया है। इसके प्रावधानों के तहत पहले से लैब में सेवारत टेक्नीशियन आदि कर्मचारी एजेंसी के माध्यम से कार्य करेंगे, लेकिन अस्पताल की ओर से जिन टेक्नीशियन के राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल (आरपीएमसी) में रजिस्ट्रेशन है उनके ही नाम दिए गए। लैब टेक्नीशियन, ऑपरेटर व वार्ड ब्वॉय समेत 20 संविदा कार्मिकों के नाम नहीं दिए गए। इससे एजेंसी ने दूसरे कार्मिकों को लगा लिया और एक फरवरी से 20 संविदाकार्मिकों को हटा दिया। इससे आक्रोशित लैब टेक्नीशियन दोपहर करीब साढ़े 3 बजे टंकी पर चढ़ गए ओर हटाए गए सभी कार्मिकों को वापस लगाने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। ्रसंविदाकर्मियों ने पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2016 में राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल का गठन हुआ था। उन्होंने इससे पहले लैब टेक्नीशियन का कोर्स (डीएमएलडी) कर लिया था। अब काउंसिल उनका रजिस्ट्रेशन नहीं कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर पूर्व में भी बिना रजिस्ट्रेशन वाले कार्मिकों को संविदा से हटा दिया गया था। उस समय भी बारां जिला अस्पताल के कई कार्मिक न्यायालय गए थे और न्यायालय के स्टे पर उन्हें वापस लिया गया था। तब से यह भी सेवा दे रहे थे। अब एजेंसी ने उन्हें आरपीएमसी में रजिस्ट्रेशन नहीं होने की बात कहते हुए हटा दिया। वह बरसों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें किसी भी भर्ती प्रक्रिया के तहत स्थायी नहीं किया जा रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन को लेकर सरकार के स्तर पर विकल्प व्यवस्था कर नीति बनाकर ऐसे कार्मिकों को राहत देनी चाहिए।

सरकार की ओर से जिला अस्पतालों में लैब एवं जांच केन्द्र का कार्य निजी एजेंसी को दिया गया है। नई एजेंसी ने किसी भी राज्य में आरपीएमसी में पंजीयन नहीं होने के कारण इनको हटा दिया। पूर्व में भी न्यायालय के स्टे पर ही इन्हें लगाया गया था। अब नियम अनुसार इनको समायोजित किया जाएगा।

डॉ. नरेन्द्र कुमार, पीएमओ, जिला अस्पताल