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विश्वसनीयता व भरोसे की डोर से बंधे हैं दुकानदार व ग्राहक के अटूट रिश्ते

बाजार की बसावट भी करीब 50 साल पुरानी है। यहां पर भी करीब 200 दुकानें हैं। यहां पर शुरूआती समय में पेडामल गेरा ने सबसे पहले किराना की दुकान लगाकर शुरूआत की थी।

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बारां

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Mukesh Gaur

Oct 21, 2024

बाजार की बसावट भी करीब 50 साल पुरानी है। यहां पर भी करीब 200 दुकानें हैं। यहां पर शुरूआती समय में पेडामल गेरा ने सबसे पहले किराना की दुकान लगाकर शुरूआत की थी।

बाजार की बसावट भी करीब 50 साल पुरानी है। यहां पर भी करीब 200 दुकानें हैं। यहां पर शुरूआती समय में पेडामल गेरा ने सबसे पहले किराना की दुकान लगाकर शुरूआत की थी।

शादी-ब्याह के कपड़ों की खरीद के लिए विख्यात, हर वर्ग के लिए कपड़ों के लिए प्रसिद्ध, गांव-कस्बों और शहर के मध्यमवर्गीय लोगों की पसंद

बारां. हर शहर में कोई न कोई ऐसी जगह जरूर होती है, जहां लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। फिर चाहे वह शादी-ब्याह के कपड़ों की बात हो या फिर जन्मदिन का अवसर हो। सभी के जेहन में एक ही बाजार का नाम आता है। शहर के प्रमुख केन्द्र प्रताप चौक के करीब इंदिरा मार्केट वो जगह है, जहां पर महिलाओं से लेकर बच्चों तक की जरूरत का हर सामान मिल जाता है। बारां शहर के हृदय स्थल में बसे इंदिरा मार्केट की भी यही कहानी है। यह न केवल शहर, बल्कि जिले दूर-दराज के गांवों-कस्बों के लोगों की जरूरतों को भी बरसों से पूरा करता आया है। व्यापार महासंघ के अध्यक्ष योगेश कुमरा ने बताया कि इस बाजार की बसावट भी करीब 50 साल पुरानी है। यहां पर भी करीब 200 दुकानें हैं। यहां पर शुरूआती समय में पेडामल गेरा ने सबसे पहले किराना की दुकान लगाकर शुरूआत की थी। इसके बाद कालांतर में यह विकसित होता गया और आज हम इसे इंदिरा मार्केट के नाम से जानते हैं। दीवाली के त्योहार के दौरान यहां पर करीब 50 करोड़ रुपए का कारोबार हो जाता है। इसके अलावा पूरे वर्षपर्यंत यहां का कारोबार भी 100 करोड़ के आंकड़े को छू लेता है।

कहने को संकरी गली, लेकिन हमेशा भीड़

इस बाजार की शुरूआत प्रताप चौक की गली से अंदर जाते ही हो जाती है। यह आगे सब्जीमंडी वाले संकरे तिराहे तक फैला हुआ है। इसका विस्तार नरङ्क्षसह भगवान के मंदिर तक है। यह 100 मीटर लंबा संकरा बाजार है। इसमें 200 से अधिक दुकानें हैं। महिला व बच्चों के कपड़ों के साथ रेडीमेड, आर्टिफिशयल ज्वैलरी, स्वर्ण आभूषण, सौन्दर्य प्रसाधन, चूड़ी कंगन, चप्पल, जूते, दर्जी, कशीदाकारी समेत अन्य कई तरह की दुकानें हैं। खास बात यह है कि अन्य बाजारों की अपेक्षा सबसे सस्ता है। यहां फैंसी, ब्राइडल वन पीस व हर नया कलेक्शन मिल जाता है। प्रतिदिन 5 से 6 हजार लोग बाजार में खरीदारी करने के लिए आते हैं।

पहले राजपुरा वार्ड के नाम से थी पहचान

किसी जमाने में इसे राजपुरा वार्ड के नाम से जाना जाता था। बाद में इसका नामकरण इंदिरा मार्केट कर दिया गया। आज से 45 साल पहले यहां पर केवल आधा दर्जन दुकानें ही हुआ करती थी। इनमें एक दुकान देशी घी, एक किराना दुकान, एक जनरल स्टोर, चाय की होटल और एक कपड़े की दुकान थी।

शहर का सबसे व्यस्ततम बाजार

बारां शहर का सबसे पुराना व व्यस्ततम बाजार भी इंदिरा मार्केट ही है। यह महिलाओं व बच्चों के लिए खास है। यहां घर की जरूरत की हर वस्तु उपलब्ध है। व्यापारी व ग्राहक के अटूट रिश्ते विश्वसनीयता व भरोसे की डोर से बंधे हैं। यहां सामान की गुणवत्ता, रिश्तों की मिठास व अपनापन है। व्यापारी व ग्राहक के बीच तीन से चार पीढिय़ों का जुड़ाव है, जो इसी मार्केट से वाजिब दामों पर सामग्री खरीदते हैं। सुख-दुख में भी साथ रहते हैं। जरूरत पडऩे पर आर्थिक सहयोग भी करते हैं। इस बाजार में हर तरह के उत्पाद मिलते हैं। महिलाओं का तो यह सबसे पंसदीदा बाजार है।

आधुनिक चमक से दूर परम्परागत खरीदारी के लिए खास बाजार होने से इंदिरा मार्केट के प्रति ग्राहकों में विश्वास है। होली, दिवाली, करवा चौथ, ईद, शादी-ब्याह सभी अवसर पर ग्राहकों का रुझान रहता है।

यतीश शर्मा, दुकानदार

इंदिरा मार्केट के प्रति ग्राहकों का विश्वास जुड़ा है। इसका कारण यहां पर वाजिब दाम में अच्छी वैरायटी का मिलना है। कारोबार में तीन से चार पीढिय़ां जुड़ी हैं। यहां के व्यापारी हमेशा मदद के लिए तत्पर रहते हैं।

प्रकाश जैन, व्यापारी

यह मार्केट एक तंग गली में बसा है, लेकिन यहां हर सीजन के हिसाब से वाजिब दामों में सभी तरह का नया कलेक्शन मिल जाता है। इसलिए ग्राहकों का तांता लगा रहता है।

अशोक अदलखा, दुकानदार

इस बाजार में नए परिधान से लेकर सौन्दर्य प्रसाधन, रसोईघर, ड्रॉइंग रूम तक की हर मांग यहां पूरी हो जाती है। महिलाओं व बच्चों के लिए खास अवसर पर खरीदारी इंदिरा मार्केट के बिना अधूरी है।

देवेन्द्र, व्यापारी

दीपावली की खरीदारी के चलते बाजार व्यस्त हैं। बाजारों में कपड़े, चूड़ी, कंगन, साज सज्जा के सामनों की खरीदारी के साथ घर गृहस्थी की जरूरत की खरीदारी भी चल रही है। महिलाओं व बच्चों में खरीदारी को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। इंदिरा मार्केट में पैर रखने की जगह नहीं है। वर्षभर ग्राहकों का मेला रहता है, लेकिन दीपावली व सावे के दिनों में पैर रखने की जगह नहीं मिलती। लोग परम्परागत खरीदारी के लिए यहां आते हैं।

पदम पिपलानी, अध्यक्ष, इंदिरा मार्केट व्यापार संघ