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बारां जिले में खुलेआम बनाते हैं स्मैक

छोटे स्पलायर पर नजर, असल तस्कर पहुंच से दूर

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बारां जिले में खुलेआम बनाते हैं स्मैक

बारां जिले में खुलेआम बनाते हैं स्मैक

dprcial news baran छबड़ा. बारां जिले के छबड़ा-छीपाबड़ौद क्षेत्र अफीम व स्मैक की तस्करी के मामले मे कुख्यात है। छबड़ा सहित दौसा व गुना पुलिस पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र के आधा दर्जन कोरियरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन सौ ग्राम स्मैक बरामद कर चुकी है। लेकिन अभी तक पुलिस के हाथ मुख्य आरोपियों तक नहीं पहुंचे हैं। इससे मादक पदार्थ तस्करों के हौसले बुलंद हैं। स्मैक छीपाबड़ौद क्षेत्र के गांवों व जंगलों में लगे कारखानों मे तैयार होती है।
दौसा पुलिस ने गत गुरुवार रात छीपाबड़ौद निवासी नितिन कुमार दर्जी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 97 ग्राम स्मैक बरामद कर मामला दर्ज किया। छबड़ा पुलिस ने भी गुरुवार को ही छीपाबड़ौद क्षेत्र के बोरखेड़ी गांव निवासी रामकिशन मीणा व बद्रीलाल मीणा को गिरफ्तार कर 127 ग्राम स्मैक बरामद की। इससे पहले 26 जनवरी को छबड़ा क्षेत्र के निपानियां गांव निवासी रहमान खान व मुराद खां को गिरफ्तार कर 80 ग्राम स्मैक बरामद कर मामला दर्ज किया गया था। पकड़े गए यह सभी आरोपी स्मैक ले जाने वाले कोरियर हैं। इन सभी को दूरी के अनुसार रुपए मिलते हैं। अफीम से स्मैक बनाने वाले मुख्य सरगना पुलिस की गिरफ्त से हमेशा दूर रहते हैं। इनका कारोबार दिनो-दिन बढ़ता ही जा रहा है। क्षेत्र के युवा नशे के दलदल में फंस कर अपना व परिजनों का भविष्य अंधकारमय बना रहे हैँ। छबड़ा में भी ढाई सौ से तीन सौ स्मैक का सेवन करने वाले युवा हैं। इन सभी को स्मैक की सप्लाई छीपाबड़ौद से ही की जाती है।
छबड़ा-छीपाबड़ौद क्षेत्र में 2500 पट्टे
एक जानकारी के अनुसार छबड़ा और छीपाबड़ौद क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 2500 अफीम के पट्टे हैं। इनमें सर्वाधिक पटट्टे छीपाबड़ौद क्षेत्र में हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश के अधिकांश शहरों में स्मैक व अफीम यहां से ही सप्लाई की जाती हैै। छीपाबड़ौद क्षेत्र के लाड़पुरिया, प्रेमपुरिया, बोरखेड़ी, गुराड़ी, धामनियां, मोतीपुरा, कडिय़ा आदि कई अन्य गांवों में ही मुख्यत: अफीम से स्मैक तैयार करने का कार्य किया जाता हैं।
डोडाचूरा से बना रहे नकली अफीम
क्षेत्र मे डोडा.चूरा से भी नकली अफीम बनाने का कार्य किया जाता हैं। छीपाबड़ौद पुलिस ने कुछ माह पहले मानपुरा में नकली अफीम बनाने का कारखाना पकड़ा था। नारकोटिस विभाग द्वारा जारी किए गए एक पट्टे में अफीम उत्पादन करने के बाद किसान के पास एक क्विंटल डोडा, चूरा शेष रहता है। नारकोटिस विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षो से डोडा-चूरा नष्टीकरण का कार्य नहीं किया गया है। इसके चलते किसान अब डोडा चूरा से भी नकली अफीम बनाने के काम में लग गए हैं।