
संत ने आशीर्वाद स्वरूप दिया था सिक्का
राम गुप्ता ने बताया कि जलेसर के ऊंचे गांव के रहने वाले उनके नाना शिव प्रसाद गुप्ता के पास यह सिक्का था। राम जब नाना के घर जाते तो वह सिक्का गुल्लक में रखा रहता था। उनके नाना बताते थे कि यह सिक्के का ही आशीर्वाद है कि उनके गुल्लक में रुपये कम नहीं होते। यह सुनकर राम के मन में भी उस सिक्के के प्रति जिज्ञासा बढ़ने लगी। जब उन्होंने नाना से पूछा कि उन्हें यह सिक्का कैसे और कब मिला तो जवाब मिला कि एक संत ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप यह सिक्का दिया था।
सिक्के पर श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी और हनुमान जी की छवि हैं अंकित
उस पर श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी और हनुमान की छवि अंकित हैं। राम ने बताया कि 14 वर्ष की उम्र में उन्हें नाना ने सिक्का सौंप दिया था। इसे पाने के बाद हृदय परिवर्तन सिक्के हुआ। गुल्लक के बजाय को मंदिर में रखकर पूजा शुरू की। तब से अब तक वह सिक्का घर के मंदिर में ही रखा है। वह प्रतिदिन उसको पूजा करते हैं। शहर से बाहर जाने पर उसे साथ ले जाते हैं।
सिक्के पर अंकित है वर्ष 1740
राम गुप्ता के मुताबिक सिक्के पर उस दौरान की भाषा में वर्ष 1740 अंकित है। सिक्का चांदी और गिलट धातु के मिश्रण से बना है। इस पर सोने की परत चढ़ी है। घिस जाने की वजह से सिक्के का आधा भाग चांदी तो आधा सोने की रंगत सा चमकता है। राम के पास वर्ष 1818 का दो आने का भी एक सिक्का है। इसके एक ओर श्रीराम दरबार और दूसरी ओर ऊँ और कमल का फूल अंकित है।
Published on:
08 Jan 2024 06:00 pm
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