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बरेली। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष की कुर्सी खाली होने के बाद जिले की राजनीति में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पद को लेकर कई कार्यकर्ताओं की नजर टिक गई है और दावेदार खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने एक दिन पहले जिलाध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार संगठन में लगातार बढ़ रही गुटबाजी, एसआईआर कार्यों में अनदेखी, बीएलए के गठन और उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लापरवाही की शिकायतें शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची थीं। हाल ही में एसआईआर प्रभारी के सामने नेताओं के बीच तकरार और आपसी खींचतान की स्थिति सामने आने के बाद नेतृत्व को यह सख्त फैसला लेना पड़ा। जिलाध्यक्ष पद रिक्त होते ही कई कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं। संगठन से जुड़े मौजूदा और पूर्व पदाधिकारी खुद को इस दौड़ में शामिल मान रहे हैं। कुछ नेताओं ने अपने नाम का दावा भी पेश करना शुरू कर दिया है, जबकि कई कार्यकर्ता लखनऊ जाकर शीर्ष नेताओं से संपर्क साध रहे हैं।
माना जा रहा है कि नए जिलाध्यक्ष के चयन में पार्टी नेतृत्व पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फैक्टर को प्राथमिकता दे सकता है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग से जुड़े किसी कार्यकर्ता को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। एसआईआर के दूसरे चरण का काम शुरू हो जाने के चलते पार्टी नए जिलाध्यक्ष की घोषणा में देरी नहीं करना चाहती। संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को गति देने के लिए जल्द ही नाम तय किए जाने की चर्चा है।
फरीदपुर क्षेत्र से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जिनकी पैरवी पार्टी के जनप्रतिनिधि कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश स्तर तक पहुंच रखने वाले एक कार्यकर्ता का नाम भी तेजी से उभर रहा है। जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद संगठन के अधिकांश पदाधिकारी फिलहाल मौन साधे हुए हैं। नए जिलाध्यक्ष को लेकर कयासों का दौर जारी है और सभी की नजरें अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर टिकी हुई हैं।
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Updated on:
21 Jan 2026 09:04 pm
Published on:
21 Jan 2026 09:01 pm

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