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बटुक भैरव जयंती- संकटों से बचाव के लिए करें बटुक भैरव का व्रत

बटुक भैरव भैरव का ही एक रूप हैं। जानें पूजनविधि और बटुक भैरव को प्रसन्न करने के उपाय।

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batuk bhairav

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बरेली। भैरव जी को भगवान शिव का रूप माना जाता है। रूद्रमायल तंत्र में 64 भैरव का उल्लेख मिलता है। ग्रंथों में भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव से मानी गई है, वहीं वेदों में भैरव जी को रूद्र कहा गया है। भैरव जी के कई रूप प्रसिद्ध हैं। उन्हीं में से एक रूप है बटुक भैरव। आज बटुक भैरव जयंती है। बटुक भैरव की उपासना से आपदा एवं संकट से मुक्ति मिलती है, साथ ही शत्रु से रक्षा हेतु एवं राहू-केतु जन्य समस्याओं के निवारण के लिए भी इनकी उपासना शीघ्र फलदायी होती है। बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार आज के दिन बटुक भैरव की पूजा का विशिष्ट महत्व है। इनकी जयन्ती से आरम्भ कर बटुक भैरव मंत्र प्रयोग शीघ्र फलदायी माना जाता है।

कैसे करें पूजा
पंडित राजीव शर्मा के अनुसार बटुक भैरव के व्रत का विधान रविवार एवं मंगलवार को है, लेकिन रविवार को रखा गया व्रत अति शीघ्र फलदायी होता है। इस दिन व्रत रखने वाले को संकल्प लेकर स्नानादि से निवृत्त होकर बटुक भैरव की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजन में लाल कनेर एवं गुलहड़ की माला अर्पित करनी चाहिए। खीर, आटे या मावे के लड्डू, बेसन के लड्डू एवं तले हुये पकवान अर्पित करना चाहिए। इस दिन की विशेष बात यह है कि कुत्ते को भोजन भी अवश्य कराना चाहिए। बटुक भैरव के उपासक को कभी भी कुत्ते को प्रताड़ित नहीं करना चाहिए, क्योंकि बटुक भैरव के लाल ध्वज पर कुत्ते का चिन्ह होता है। बटुक भैरव जयन्ती पर उनका पूजन करना आवश्यक होता है। स्वयं एवं सामग्री का शुद्धिकरण करने के पश्चात एक चौकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछा कर रोली से रंगे हुये लाल अक्षतों से अष्ट दल पुष्प बनाकर और उस पर बटुक भैरव के चित्र की स्थापना कर तदोपरान्त गणेश, अम्बिका, कलश, नवग्रह, षोडष मात्र आदि का पूजन कर प्रधान पूजा के रूप में ही बटुक भैरव की पूजा करनी चाहिए।

बटुक भैरव को प्रसन्न करने के लिए करें दीपदान
शास्त्रों में बटुक भैरव को प्रसन्न करने के लिए दीपदान का विशेष महत्व है। इसके लिए रविवार एवं मंगलवार का दिन श्रेष्ठ माना जाता है। दीपदान से भी समस्त प्रकार की आपदाओं, विपत्तियों एवं समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इसमें समस्त प्रकार की कामनाओं की पूर्ति के लिए गाय के घी से, सिद्धियों की प्राप्ति और राहू-केतु की शांति के लिए तिल के तेल से एवं विद्वेषण में ऊंटनी के घी से दीपदान करना चाहिए। दीपदान बटुक भैरव मंदिर में करना श्रेष्ठ रहता है। दीपदान भैरव जी का ध्यान करते हुये भगवान शिव के मंदिर में भी किया जा सकता है। इसमें पूर्व दिशा की ओर देखते हुये दीपदान करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। दीपदान लगातार एक वर्ष तक करना चाहिए। दीपदान से पूर्व मंत्र “ऊँ बटुक भैरवाय नमः” का 11 अथवा 108 बार जाप करना चाहिए।

बटुक भैरव की कृपा पाने के उपाय
भैरव जी की प्रसन्नता हेतु रविवार वाले दिन सरसों के तेल में उड़द के पकौड़े, पापड़, पूए आदि तल कर रखें तथा दूसरे दिन इन्हें गरीब बच्चों में बांट दें। इसके बाद किसी भैरव मंदिर में जाकर दर्शन अवश्य करें।

भैरव जी को मदिरा चढ़ाई जाती है और इससे भैरव जी काफी प्रसन्न होते हैं। लेकिन मदिरा चढ़ाने के स्थान पर भैरव जी की कृपा प्राप्ति करने के लिए नारियल का पानी भी चढ़ा सकते हैं, जिससे भैरव जी अति प्रसन्न होते हैं।

किसी शुभ कार्य के लिए जाते समय बाधाओं को रोकने के लिए प्रातःकाल रविवार को किसी भी भैरव मंदिर में जाकर वहीं भैरव जी को सिंदूर का चोला चढ़ायें। बटुक भैरव स्त्रोत का पाठ करें, इसके बाद काले रंग की गाय को रोटी डालें और कुत्ते को इमरती खिलायें। बटुक भैरव जी की कृपा प्राप्त होगी। रविवार के दिन अपने घर के आगे किसी प्रकार की गंदगी एवं कूड़ा नहीं डालना चाहिए। कुत्तों की सेवा करने से भी बटुक भैरव जी अधिक प्रसन्न होते हैं।

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