
बदायूं। जनपद के कादरचौक में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रसव के नाम पर क्रूरता की हदें पार कर दी गईं। सीने पर बैठकर पेट दबाने की अमानवीय हरकत के चलते नवजात की मौत हो गई। मामले में तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी डा. अवधेश राठौर, उनकी बहन मोनिका समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शासन की सख्ती के बाद डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर अब भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी डॉक्टर सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को सुविधाओं का हवाला देकर अपने निजी नर्सिंग होम ‘राधिका’ में शिफ्ट कराता था। यही नहीं, वहां भर्ती कराकर मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती थी। यह पूरा नेटवर्क एक संगठित रैकेट की तरह काम कर रहा था, जिसमें स्टाफ की मिलीभगत भी सामने आई है।
ललसीनगला निवासी कृष्णावती को प्रसव पीड़ा होने पर पहले सीएचसी कादरचौक में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां से उन्हें जबरन राधिका नर्सिंग होम भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक, 15 हजार रुपये लेने के बाद प्रसव कक्ष में एक महिला ने कृष्णावती के सीने पर बैठकर पेट दबाना शुरू कर दिया। दर्द से कराहती महिला की किसी ने नहीं सुनी और इसी दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया। यह पूरा घटनाक्रम चिकित्सा के नाम पर बर्बरता की तस्वीर पेश करता है।
नवजात की मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने जमकर हंगामा किया। सूचना पर एसडीएम मोहित कुमार, सीओ सुनील कुमार और प्रभारी सीएमओ डा. मोहन झा मौके पर पहुंचे। जांच में नर्सिंग होम बिना लाइसेंस संचालित मिलता पाया गया, जिसके बाद उसे तत्काल सील कर दिया गया। मौके पर कोई प्रशिक्षित स्टाफ भी नहीं मिला, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी चिकित्सा प्रभारी को सिर्फ कादरचौक से हटाकर ककराला सीएचसी का प्रभारी बना दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर विभाग की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं—क्या यह सजा है या ‘इनाम’?
प्रभारी सीएमओ डा. मोहन झा के अनुसार, प्रसव के दौरान अमानवीयता और नवजात की मौत के मामले में पांच आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। डीएम द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
28 Apr 2026 11:52 am
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