
बरेली। स्मार्ट सिटी परियोजना अर्बन हाट में बड़ा घोटाला सामने आया है। अप्रैल 2024 में संचालन का ठेका मिलने के बाद भी कार्यदायी एजेंसी वैग्माइन इंटरप्राइजेज ने 14 नवंबर तक स्मार्ट सिटी कंपनी के साथ अनुबंध नहीं किया, लेकिन इसी अवधि में ऑडिटोरियम और कैंपस की निजी बुकिंग कर वसूली करती रही। इस मनमानी से स्मार्ट सिटी को 1.19 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
157.67 करोड़ की लागत से बनी अर्बन हाट की बिल्डिंग दिसंबर 2023 में तैयार हुई थी। 30 वर्ष के लिए संचालन का ठेका देते समय यह प्रावधान था कि एजेंसी को स्मार्ट सिटी से अनुबंध करना होगा, तभी संचालन अधिकार मिलेंगे। लेकिन एजेंसी ने महीनों तक अनुबंध को टालकर अर्बन हाट को निजी आयोजनों का केंद्र बनाकर रख दिया।
मामला उजागर होने पर सीईओ संजीव मौर्य ने ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वसूली गई राशि की भरपाई कराई जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
अप्रैल से नवंबर तक अनुबंध का लंबित रहना अब संदेह के घेरे में है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि फाइल ठेकेदार मोनू झाबर की सुविधा के अनुसार ही आगे बढ़ाई जाती रही। राजस्व नुकसान की जानकारी होने के बाद भी किसी अधिकारी ने प्रश्न नहीं उठाया। अनुबंध की देरी से सीधे ठेकेदार को फायदा हुआ। इन परिस्थितियों में विभागीय मिलीभगत की भी चर्चा शुरू हो गई है।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि निर्माण एजेंसी आरपीपी इंफ्रा ने आज तक स्मार्ट सिटी को परियोजना का आधिकारिक हैंडओवर नहीं दिया है। ऐसी स्थिति में प्रोजेक्ट ऑपरेशनल नहीं माना जाता, किसी भी निजी संस्था को संचालन अधिकार देना नियमों के खिलाफ होता है।इसके बावजूद ठेकेदार को पूरे कैंपस में कार्यक्रम कराने की अनुमति मिलना स्वयं में गंभीर लापरवाही है।
अर्बन हाट विवाद का प्रभाव अब अन्य योजनाओं पर भी देखने को मिला है।जीआईसी ऑडिटोरियम की बुकिंग पर असर पड़ा। नगर निगम को राजस्व नुकसान उठाना पड़ा। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। बिना अनुबंध संचालन ने न केवल वित्तीय जोखिम बढ़ाया, बल्कि परियोजना की मूल भावना को भी नुकसान पहुंचाया।
प्रकरण सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी प्रशासन ने पूरी जांच शुरू कर दी है। ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। स्मार्ट सिटी सीईओ ने स्पष्ट कहा है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनुबंध से पहले किसी भी प्रकार की वसूली अवैध है। नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
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Updated on:
15 Nov 2025 03:34 pm
Published on:
15 Nov 2025 08:59 am
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