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बरेली में काट दिए दर्जनों हरे पेड़, तीन दिन से दबाये बैठे अफसर, एफआईआर नहीं, जानें क्या है मामला

बरेली। आलमपुर जाफराबाद में सेना की जमीन पर खड़े हरे भरे पेड़ों को काट दिया। इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई। अफसर जानकारी न होने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं। यही वजह है कि इसमें अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक कार्यक्रम के लिए जमीन को खाली कराया जा रहा है। जिससे वहां बड़ी जनसभा कराई जा सके। मामला सुर्खियों में आने के बाद वन विभाग से लेकर प्रशासन के अफसरों ने चुप्पी साधी है।

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पांच साल में ये पौधे पेड़ में तब्दील हो चुके थे

आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक के फौजी पड़ाव आलमपुर में सेना की करीब सात हेक्टेयर जमीन है। यहां 2019 में खैर के 77 सौ पौधे लगाए गए थे। पांच साल में ये पौधे पेड़ में तब्दील हो चुके थे। लोकसभा चुनाव से पहले अब फिर इस जगह को चुनावी जनसभा के लिए तैयार किया जा रहा है। सोमवार को यहां हेलिपैड बनाने के लिए जिले के उच्चाधिकारियों ने निरीक्षण किया था। इसके बाद चिह्नित स्थल पर खड़े तमाम पेड़ों को काट दिया गया।

अनुमति के बगैर ही पेड़ कटवा दिए गए

कहा जा रहा है कि अधिकारियों के कहने पर ही पेड़ों को काटा गया। पेड़ काटने से पहले सेना और वनविभाग से न अनुमति ली गई न कोई सूचना दी गई। माना जा रहा है कि चूंकि ये पेड़ सरकारी योजना के तहत लगाए गए थे, इसलिए उन्हें काटने का कारण स्पष्ट करना संभव नहीं था। इसके बावजूद अगर अनुमति लेकर पेड़ों को काटा जाता तो साफ हो जाता कि प्रशासन ने चुना चुनावी जनसभा के लिए पेड़ कटवाए हैं, इसीलिए अनुमति के बगैर ही उन्हें कटवा दिया गया।

तो अफसरों ने चुनावी जनसभा के लिए चोरी- छिपे कटवाए पेड़

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक डेढ़ सौ से ज्यादा पेड़ काट दिए गए हैं। आंवला के रेंजर सुशील बिष्ट ने बताया कि पेड़ काटे जाने की सूचना पर वह मंगलवार देर शाम मौके पर पहुंचे थे, लेकिन पेड़ काट रहे लोग अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। मौके पर वनरक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। इन बारे में आलमपुर जाफराबाद के बीडीआ से भी बात करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। डीएफओ बरेली दीक्षा भंडारी ने बताया कि मंगलवार शाम इस मामले में शिकायत मिली थी। आंवला के रेंजर को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।


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