
बरेली। शाहजहांपुर रोड स्थित नरियावल में चल रही मीट फैक्ट्रियों के भीतर लंबे समय से पल रहे टैक्स चोरी के खेल पर जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) ने करारी चोट की है। मारिया फ्रोजन और रहबर फूड्स में 26 घंटे से अधिक चली मैराथन छापेमारी के बाद करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी सामने आई है। दबाव बढ़ते ही दोनों फैक्ट्री संचालकों ने ₹1 करोड़ की जीएसटी तत्काल जमा कर दी, फिर भी जांच नहीं थमी।
डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह और रोहित मालवीय के नेतृत्व में 10 असिस्टेंट कमिश्नर, 15 स्टेट टैक्स अधिकारी और 20 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में दोनों फैक्ट्रियों पर एक साथ कार्रवाई शुरू हुई। टीम ने फैक्ट्रियों के मेन गेट सील कर अंदर–बाहर की आवाजाही रोकी और दस्तावेज जब्त किए।
जांच के दौरान जानवरों की खरीद, मांस की सप्लाई, लेबर, अकाउंट और एंट्री सेक्शन के सभी बिल–बुक और रजिस्टर खंगाले गए। बैंक खातों की जानकारी ली गई। फैक्ट्रियों में मौजूद जानवरों, कर्मचारियों और वाहनों की गिनती कर पैक मांस के स्टॉक से दस्तावेजों का मिलान किया गया। शुरुआती जांच में बिलों में गड़बड़ी और फर्जी बिलिंग के संकेत मिले हैं।
छापेमारी के बीच ही संचालकों ने ₹1 करोड़ की जीएसटी जमा कर दी, लेकिन विभाग ने इसे स्वीकार कर कार्रवाई और कड़ी कर दी। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम का तत्काल जमा होना खुद टैक्स चोरी की पुष्टि करता है। वास्तविक देयता कितनी है, इसका पता स्टॉक–दस्तावेज मिलान के बाद चलेगा। इसमें 2–3 दिन की प्रारंभिक जांच लगेगी, जिसके बाद आगे की विधिक कार्रवाई होगी।
फैक्ट्रियों के आकार, कर्मचारियों व जानवरों की संख्या अधिक होने और दस्तावेजों की व्यापक जांच के कारण कार्रवाई गुरुवार शाम पांच बजे तक चली। इसके बाद टीमें बाहर निकलीं। “दोनों फैक्ट्रियों में कई घंटों की जांच में करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी के संकेत मिले हैं। ₹1 करोड़ जमा कराया गया है। दस्तावेजों के मिलान के बाद आगे की सख्त कार्रवाई होगी।” आशीष निरंजन, अपर आयुक्त, राज्य कर विभाग
Published on:
23 Jan 2026 11:33 am

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