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कब तक दहेज की बलि चढ़ती रहेंगी बेटियां… दहेज के लिए विवाहिता की जहर देकर हत्या, न्याय को दर-दर भटक रहा भाई

किला थाना क्षेत्र के खन्नू मोहल्ले में दहेज की लालसा ने बहन की जान छीन ली। शादी के कुछ ही दिनों बाद से प्रताड़ित शहनाज को पति और ससुराल वालों ने पीटा, भूखा रखा और धमकियां दी, बाद में जहर देकर उसकी हत्या कर दी गई। मोहसिन खान न्याय की गुहार लगाते हुए थानों-दर-थानों भटक रहा है।

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बरेली। किला थाना क्षेत्र के खन्नू मोहल्ले में दहेज की लालसा ने बहन की जान छीन ली। शादी के कुछ ही दिनों बाद से प्रताड़ित शहनाज को पति और ससुराल वालों ने पीटा, भूखा रखा और धमकियां दी, बाद में जहर देकर उसकी हत्या कर दी गई। मोहसिन खान न्याय की गुहार लगाते हुए थानों-दर-थानों भटक रहा है, जबकि परिजन और मोहल्ले के लोग इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध हैं। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि दहेज प्रथा की बर्बरता और समाज के ज़मीर पर एक काला धब्बा है।

शहनाज़ की शादी 23 अप्रैल 2017 को मुस्लिम रीति-रिवाज से माजिद नवाज के साथ हुई थी। भाई मोहसिन खान बताते हैं कि शादी के कुछ ही दिनों बाद से बहन की जिंदगी नरक में बदल गई। कम दहेज का ताना, गालियाँ, मारपीट शहनाज़ की रोजमर्रा की कहानी बन चुकी थी। पति, जेठ, जेठानी, ननद और नंदोई कोई ऐसा नहीं था जिसने उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से नहीं गुजराया।

लालच की आग और अनगिनत धमकियां

मोहसिन ने बताया कि कई बार पंचायतें हुईं और रिश्तेदारों ने समझाया। नकद रकम भी दी गई, लेकिन लालच की आग कम होने का नाम नहीं ले रही थी। कार और पांच लाख रुपये की मांग पूरी न होने पर शहनाज को भूखा रखा गया, पीटा गया और जान से मारने की धमकियां दी गईं। शहनाज़ ने खुद अपने भाई को फोन पर अपनी पीड़ा बताई थी, और वह कॉल रिकॉर्डिंग आज भी मौजूद है। मोहसिन ने बताया कि 14 जनवरी की सुबह साढ़े नौ बजे, जेठानी शीवा ने घबराहट में फोन किया कि शहनाज की तबीयत बहुत खराब है। अस्पताल पहुंचने पर परिजन केवल उसकी ठंडी देह देख पाए। मुंह से झाग, नीले पड़े हाथ और चोट के निशान इस बात का संकेत दे रहे थे कि शहनाज को जहर दिया गया था।

इंसाफ की गुहार, मुकदमा दर्ज करने की मांग

मोहसिन ने किला थाने में पति माजिद नवाज, जेठ वारिस खान, जेठानी शीवा, ननद रूबी और नंदोई ताज खान के खिलाफ हत्या और दहेज उत्पीड़न जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। उनकी आंखों में दर्द है, लेकिन इंसाफ की उम्मीद भी जिंदा है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि दहेज आज भी बेटियों की जान ले रहा है। सवाल सिर्फ कानून का नहीं, समाज की सोच का भी है। कब तक बेटियां लालच की आग की बलि चढ़ती रहेंगी।

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