
मौलाना शहाबुद्दीन और बाबा धीरेंद्र शास्त्री
बरेली। बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध साधु बाबा धीरेंद्र शास्त्री के हालिया बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सोमवार को जारी एक बयान में इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। शास्त्री के बयान में मुसलमानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था, जिस पर मौलाना रजवी ने इसे भड़काऊ और अनुचित बताया।
मौलाना रजवी ने कहा कि बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने मुसलमानों से कहा कि चच्चा के 30 बच्चे होते हैं, तुम लोग भी ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करो। रजवी ने इस बयान को समाज में असामाजिक भावनाओं को भड़काने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों का होना खुदा की नियमतों में से एक बड़ी नियमत है और इसे किसी समुदाय के खिलाफ टिप्पणी के रूप में पेश करना गलत है। मौलाना ने कहा कि किसी व्यक्ति के बच्चे होने या न होने का समाज या धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। बच्चों की संख्या का आंकड़ा किसी समुदाय के लिए तुलना का विषय नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग बच्चों का सुख नहीं पा पाते, वे धर्म स्थलों का चक्कर लगाते हैं और सूफी संतों के दरबार में हाजिरी देते हैं, ताकि उन्हें मानसिक शांति और आशीर्वाद मिले।
मौलाना रजवी ने कहा कि बच्चों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उनकी परवरिश और शिक्षा है। उन्होंने बाबा धीरेंद्र शास्त्री को नसीहत देते हुए कहा कि पहले उन्हें खुद शादी और परिवार का अनुभव करना चाहिए। तभी उन्हें यह समझ आएगा कि बच्चों को सही तरीके से पालना और उनकी शिक्षा देना कितना जिम्मेदार कार्य है। रजवी ने कहा कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक नेता का यह कर्तव्य है कि वह समाज में सकारात्मक संदेश दें। बच्चों की संख्या को लेकर भड़काऊ बयान देना न केवल अनुचित है बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित कर सकता है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने स्पष्ट किया कि पूरे भारत में कोई भी मुसलमान ऐसा नहीं है जिसके 30 बच्चे हों। उन्होंने कहा कि छह-सात बच्चे सामान्य सीमा में आते हैं, लेकिन 30 बच्चों वाली बात असत्य और भड़काऊ है। रजवी ने इसे बहुसंख्यक समुदाय को उकसाने और समाज में तनाव फैलाने वाला बयान करार दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सामाजिक नेताओं को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
मौलाना रजवी ने अंत में सभी समुदायों से अपील की कि वे धार्मिक सौहार्द और समाजिक शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को निशाना बनाना या संख्या के आधार पर तुलना करना समाज में विभाजन पैदा कर सकता है। ऐसे समय में जरूरी है कि नेता और धर्मगुरु समाज में आपसी सम्मान और समझदारी को बढ़ावा दें। रजवी ने यह भी कहा कि बच्चों का होना और परिवार की परवरिश मानव जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसे किसी प्रकार के भड़काऊ संदर्भ में प्रस्तुत करना गलत है।
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Published on:
19 Jan 2026 02:25 pm
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