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दूध की ‘ पतली ‘ होती धार, डेयरी बनवा रही घी और मिल्क पाउडर

-आवक ज्यादा, खपत हो गई कम-स्कूलें बंद होने से नहीं जा रहा दूध-बड़े आयोजन पर रोक से दूध की खपत नहीं-घी और पाउडर बनाने के लिए अतिरिक्त दूध भेज रहे रानीवाड़ा

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दूध की ' पतली ' होती धार, डेयरी बनवा रही घी

दूध की ' पतली ' होती धार, डेयरी बनवा रही घी

बाड़मेर. कोविड के कारण स्कूलें बंद होने तथा बड़े आयोजनों पर रोक के चलते दूध की खपत आधी से कम रह गई है। इसके चलते सरस डेयरी के पास अतिरिक्त दूध बच रहा है। ऐसे में उस दूध से घी और पाउडर बनाने रानीवाड़ा भेज रही है।
डेयरी को अभी जितना दूध मिल रहा है, उससे खपत आधी से भी कम है। इसके कारण यहां आने वाला दूध सरप्लस हो जाता है। डेयरी इस दूध को अन्य यूनिट को भी भेजती है। लेकिन कोविड के कारण अधिकांश स्थानों पर डिमांड कम ही है। इसके कारण दूध से घी और दूध पाउडर बनवाया जा रहा है।
खपत जहां वहा लगे है ताले
सरकारी स्कूलों मेें बच्चों को मिलने वाला दूध भी काफी डेयरी से ही जाता रहा है। अभी स्कूल में केवल शिक्षक आ रहे हैं कक्षाओं पर तो अभी भी ताले लटक रहे हैं। जबकि स्कूलों में दूध शुरू होने के बाद यहां पर सबसे ज्यादा खपत होती थी। पिछले अप्रेल महीने से सरकारी स्कूल खुले ही नहीं।
सभी कार्यक्रम छोटे स्तर पर
बड़े आयोजनों और शादी समारोह होने से दूध की डिमांड मार्केट में बनी रहती थी। डेयरी के पास एडवांस ऑर्डर आ जाते थे। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि ऑर्डर ज्यादा होने के कारण अन्य शहरों से दूध मंगवाना पड़ा। जब से कोविड महामारी का दौर शुरू हुआ तभी से शादी समारोह छोटे स्तर पर घरों में ही हुए हैं। इसके अलावा अन्य किसी तरह के बड़े आयोजन भी नहीं हो रहे हैं। इसके कारण दूध की डिमांड पर काफी असर पड़ा और डेयरी के पास दूध की तरलता ज्यादा हो गई।
घी और पाउडर बनवाते हैं
अतिरिक्त बचने वाले दूध से घी और पाउडर बनवाते हैं। किसी अन्य यूनिट को जरूरत हो तो वहां पहले भेजते हैं। इसके बाद जो दूध बचता है, उसे रानीवाड़ा भेज देते हैं, जहां से घी और दूध पाउडर बनकर हमे मिल जाता है। अभी आवक से करीब आधा से ज्यादा दूध अतिरिक्त हो रहा है।
ओपी सुखाडिय़ा, एमडी बाड़मेर सरस डेयरी