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सबको बराबर बांट रही सरकार, फिर छोटे जिलों में क्यों आएगा निवेश

राजस्थान में पर्यटन निवेश बड़े शहरों तक सिमटता नजर आ रहा है, जबकि छोटे जिलों में पर्यटन परियोजनाओं को लेकर निवेशकों की रुचि बेहद कम है।

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बाड़मेर. राजस्थान में पर्यटन निवेश बड़े शहरों तक सिमटता नजर आ रहा है, जबकि छोटे जिलों में पर्यटन परियोजनाओं को लेकर निवेशकों की रुचि बेहद कम है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई छोटे जिलों में प्रोजेक्ट आवेदनों की संख्या दहाई तक भी नहीं पहुंच सकी। इसकी मुख्य वजह छोटे जिलों में पर्यटन विकास को लेकर सरकार की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। बड़े शहरों के मुकाबले छोटे जिले इंफ्रास्ट्रक्चर और अपने पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग में कमी, उनकी भौगोलिक परििस्थतियों के हिसाब से पर्यटन नीति नहीं होने का खामियाजा भुगत रहे हैं।
इसी का नतीजा है कि डीग में केवल 2 आवेदन आए, जिनमें 1 स्वीकृत हुआ। धौलपुर में 4, सलूम्बर में 4, बांसवाड़ा में 6 और बालोतरा में 8 आवेदन ही दर्ज हुए। दौसा में 9 तथा प्रतापगढ़ में 10 आवेदन आए। दूसरी ओर अजमेर, उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, पाली, जैसलमेर निवेशकों की पसंद बने हुए हैं। यहां सबसे ज्यादा निवेश प्रस्ताव विभाग के पास आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को छोटे जिलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन नीति बनानी होगी तभी ये जिले निवेशकों को आकर्षित कर पाएंगे।

ये प्रमुख कारण हैं निवेश नहीं आने के

1- सरकार की नीतियां छोटे जिलों के हिसाब से पर्यटन फ्रेंडली नहीं है। वहां की भौगोलिक परििस्थति के अनुसार सुविधाएं देनी चाहिए।
2 - छोटे जिलों के पर्यटन महत्व के स्थलों की सही ब्रांडिंग नहीं है।
3- सभी जगह सब्सिडी एक समान है, जबकि छोटे शहरों में सब्सिडी ज्यादा देनी चाहिए।
4- छोटे जिलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी। देश और प्रदेश के बड़े शहरों से बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी नहीं है। सड़क, पानी, बिजली सुविधाएं मतबूत नहीं।
इस उदाहरण से समझें निवेश कैसे आएगा
जोधपुर में पिछले पांच साल में करीब आठ नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ) खुले हैं। इनमें से ज्यादातर पहले जयपुर में खुलने वाले थे। लेकिन जोधपुर में उन्हें सस्ती जमीन मिली तो यहां खुल गए। इससे निवेश भी आया और युवाओं को रोजगार भी मिला।

छोटे जिले में भी निवेश आ सकता है

जैसलमेर में पर्यटन क्षेत्र में मेघराज सिंह रॉयल और उनके पुत्र मानवेंद्र सिंह ने करीब डेढ़ दशक पहले सम मार्ग में होटल का निर्माण करवाया। प्रीमियम मेहमान इस होटल में ठहरते हैं। मौजूदा समय में इसका विस्तार किया गया है।

माहौल अभी नहीं बन पाया

राजस्थान में पर्यटन निवेश की चर्चा होती है तो सबसे पहले जयपुर, उदयपुर और जैसलमेर जैसे बड़े शहरों का नाम सामने आता है। छोटे जिलों में भी अपार संभावनाएं हैं, लेकिन वहां निवेश का माहौल अभी भरोसेमंद नहीं बन पाया है। प्रचार के अभाव में पर्यटकों को जानकारी नहीं है। कई बार औपचारिकताओं में समय लगने के कारण निवेशकों का उत्साह कम हो जाता है।

  • कैलाश कुमार व्यास, रिसोर्ट व्यवसाईआधारभूत सुविधाओं में कमीइन जिलों में पर्यटन के लिए आधारभूत सुविधाएं अभी पर्याप्त नहीं हैं। सड़क, एयर और रेल कनेक्टिविटी सीमित होने से पर्यटकों की आवाजाही कम रहती है। निवेशक यह देखता है कि यदि होटल या रिसॉर्ट बनाया जाए तो वहां सालभर पर्यटक आएंगे या नहीं। जब संभावित पर्यटक संख्या स्पष्ट नहीं होती तो निवेश जोखिमपूर्ण लगने लगता है। साथ ही किसी स्थान का लोकप्रिय होना भी जरूरी है।
  • मयंक भाटिया, होटल व्यवसाईपर्यटन निवेश के लिए एक समान नीतिराज्य में पर्यटन निवेश को बढ़ावा देने के लिए छोटे और बड़े जिलों के लिए अलग-अलग नहीं, बल्कि एक समान नीति लागू है। निवेश की संभावनाएं प्रत्येक जिले की भौगोलिक, औद्योगिक और पर्यटन परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग होती हैं।बाड़मेर जिले की बात करें तो यहां औद्योगिक गतिविधियां अधिक हैं, जबकि पर्यटन क्षेत्र अपेक्षाकृत कम विकसित है। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में निवेश के अपने अलग आयाम होते हैं और संभावनाएं भी उसी आधार पर विकसित होती हैं।-कमलेश्वर सिंह, सहायक निदेशक, पर्यटन विभाग, बाड़मेर
  • छोटे शहरों में पर्यटन बढ़ाने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार को नीतियों में बदलाव की जरूरत है। जैसे बाडमेर में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा है। इसलिए यहां बॉर्डर ट्यूरिज्म विकसित नहीं हो पा रहा। डीग जिले की बात करें तो इसे ब्रज के धार्मिक और सांस्कृतिक सर्किट से जोड़ा जा सकता है। श्रद्धालु गोवर्धन परिक्रमा के बाद आसानी से डीग आ सकते हैं। हर जिले की भौगोलिक और पर्यटन के लिए आकर्षित करने वाली साइट के हिसाब से नीति बनाई जाए। उनकी ब्रांडिंग करें। बड़े शहरों के मुकाबले वहां इंफ्रास्ट्रक्चर भी बेहद कमजोर है। इन जिलों में निवेशकों को सब्सिडी भी ज्यादा देनी चाहिए। अभी सब्सिडी सभी जगह एक समान मिलती है।
  • रावत त्रिभुवन सिंह, गढ़ बाड़मेर
  • छोटे जिलों में आवेदनों की स्थितिजिला -आवेदन - स्वीकृत -लंबित -खारिजडीग - 2 - 1 - 1 - 0करौली - 3 - 2 - 1 - 0धौलपुर - 4 - 3 - 0 - 1सलूम्बर - 4 - 4 - 0 - 0बांसवाड़ा - 6 - 2 - 0 - 4खैरथल-तिजारा - 7 - 7 - 0 - 0बालोतरा - 8 - 4 - 0 - 4दौसा - 9 - 6 - 0 - 3प्रतापगढ़ - 10 - 6 - 1 - 3टोंक - 13 - 8 - 1 - 4बाड़मेर - 14 - 6 - 0 - 8हनुमानगढ़ - 14 - 7 - 1 - 6डीडवाना-कुचामन - 15 - 12 - 1 - 2
  • टॉप 10 जिले सबसे ज्यादा आवेदन वालेजिला -आवेदन - स्वीकृत -लंबित -खारिजउदयपुर - 780 - 535 - 30 - 215जयपुर - 605 - 419 - 27 - 159अजमेर - 443 - 313 - 21 - 109जोधपुर - 269 - 188 - 8 - 73पाली - 261 - 152 - 30 - 79राजसमंद - 182 - 120 - 23 - 39कोटा - 168 - 113 - 14 - 41अलवर - 153 - 84 - 5 - 64जैसलमेर - 144 - 97 - 8 - 39बीकानेर - 133 - 86 - 4 - 43(नोट: डाटा जनसूचना पोर्टल पर दी गई जानकारी के अनुसार)

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