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बाड़मेर: अकाल पड़ने से मुसीबत में अन्नदाता, पलायन शुरु; आधी जली-आधी पकी फसल लेकर कमाई के लिए गुजरात निकल रहे

  - गुजरात में मजदूरी के लिए हुए रवाना

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अकाल पडऩे पर किसानों का पलायन शुरु

अकाल पडऩे पर किसानों का पलायन शुरु

बालोतरा.

क्षेत्र में इस वर्ष पड़े अकाल पर किसानों का पलायन शुरू हो गया है। पाटोदी क्षेत्र के किसान खेतों में आधी जली- आधी पकी फसल लेकर कमाई के लिए गुजरात की ओर जा रहे हैं। यहां पांच-छह माह कमाई कर ये खरीफ बुवाई से पूर्व वापिस घरों को लौटेंगे।
क्षेत्र में इस वर्ष पड़े अकाल पर खेतों में आधी जली- आधी पकी फसलों निकाल कर किसान अब गुजरात की ओर पलायन कर रहे हैं। ऊंट गाडिय़ां लेकर बड़ ी संख्या में किसान गुजरात की ओर जा रहे हैं। यहां खेतों में रबी फसल लेकर ये मानसून पूर्व वापिस घरों को लौटेंगे। इस पर कई गांवों में अब सूनापन पसर गया है।

इसलिए हो रहा पलायन- कई लोगों ने नहरी क्षेत्र व सिंचित इलाकों को बनाया ठिकाना- संकट में काम आ रही रिश्तेदारी
बाड़मेर .

जिले के कई गांवों में इस बार बिल्कुल बारिश नहीं होने से अकाल की स्थिति है। सरकारी स्तर पर चारे-पानी व रोजगार की व्यवस्था नहीं होती देख पशुपालक मवेशियों के साथ पलायन कर रहे हैं। वहीं युवा रोजगार के लिए अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की कई ढाणियां बंद नजर आने लगी हैं, वहीं कई लोग मजबूरन बच्चों व बुजुर्गों को घर में ही छोड़ बाहर गए हैं।

जिले में कई जगहों पर मौसम की एक भी बारिश नहीं हुई, वहीं कई गांवों में पहली बरसात के बाद किसानों ने बुवाई तो कर दी, लेकिन फिर बादल नहीं बरसे। ऐसे में किसानों को बुवाई व खरपतवार निकालने का अतिरिक्त खर्चा उठाना पड़ा।
नहरी व बारिश वाले क्षेत्र ठिकानाअकाल वाले गांवों से पलायन कर रहे लोग नहरी क्षेत्र व बरसात वाले इलाकों में रहने वाले रिश्तेदारों के यहां डेरा डाल रहे हैं। इसके लिए लोगों को मवेशियों के साथ सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा तय करनी पड़ रही है। कई लोग जैसलमेर के फतेहगढ, मोहनगढ़, रामगढ़, राजमथाई सहित अन्य सिंचित इलाकों में पशुओं के साथ पहुंचे हैं।

पशु और खेती ही आजीविका

गांवों में अधिकांश लोगों का खेती और पशुपालन ही आजीविका का साधन है। बरसात के अभाव में किसानों की पहली बांह तो टूट गई, अब हर हाल में उनके लिए अपने पशुओं को बचाना ही प्राथमिकता है।
नहीं मिल रहा चारा, बेसहारा छोड़ाजिले भर में चारे-पानी का संकट है। यहां 500 रुपए मण(40 किलो) के भाव से भी चारा नहीं मिल रहा है। ऐसे में जो लोग पशुओं को लेकर बाहर नहीं जा पाए उन्होंने अपने मवेशियों को आंखों के सामने मरते देखने की बजाय दूर ले जाकर जंगल में बेसहारा छोड़ दिया।
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बच्चों के साथ बुजुर्ग मां को घर की जिम्मेदारी

बायतु तहसील के चौखला निवासी पेलाद तथा उनके बड़े भाई वीरमाराम भांभू पशुओं को लेकर बाहर गए हुए हैं। परिवार के युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में गए हैं। ऐसे में उनकी 75 वर्षीय बुजुर्ग मां और बच्चों को घर की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
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बंद करना पड़ा घर
रामसर तहसील की ग्राम पंचायत इन्द्रोई निवासी दादूनाथ मजदूरी पर गए हैं तथा परिवार के अन्य सदस्य ढाणी बंद कर पशुओं को बचाने के लिए उनके साथ बाहर गए हैं।

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इन गांवों में अकाल का साया, कई लोगों ने किया पलायन
बाटाडू क्षेत्र के किशने का तला, रेवाली, डेडवाली, नया सिंगोडिय़ा, सिगोडिय़ा, लूनाड़ा में रामदान का तला, सांइयों का तला, कोलू, हुड्डों की ढाणी, भीमड़ा, चौखला से कई लोग पलायन कर चुके हैं। शिव क्षेत्र के स्वामी का गांव, मुंगेरिया, बालासर, हाथीसिंह का गांव, कोटड़ा, शिव, निंबला, गूंगा, हड़वा, राजडाल, धारवी कला, धारवी खुर्द, विश्व कला सहित कई पंचायतों में भीषण अकाल है। रामसर, गडरारोड, चौहटन, धोरीमन्ना सहित कई क्षेत्रों से लोग अपने मवेशियों के साथ सिंचित इलाकों व नहरी क्षेत्र की ओर गए हैं। गिड़ा के खोखसर हीरा की ढाणी, केसूम्बला, रतेऊ, खिम्पस, चौहटन तहसील के रमजान की गफ न आरबी की गफ न, सादुल की गफ न, नवापुरा, उदासियार, उम्मेदपुरा, कल्याणपुरा सहित केलनोर, शोभाला, भोजारिया, बावडी कला, बींजासर, देदूसर, नवातला आदि पंचायतों में मानसून की एक भी बरसात नहीं हुई। वहीं कई गांवों में बुवाई के बाद बारिश नहीं होने से फसलें जल गई।

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चौखला से ये लोग कर गए पलायन
- गजाराम पुत्र दीपाराम, फूलासर- प्रहलादराम पुत्र मूलाराम, फूलासर
- जैसाराम पुत्र नैनाराम, नवलदेव छतरी

- विरधाराम पुत्र नैनाराम, नवलदेव छतरी
- प्रहलादराम पुत्र पेमाराम, नवलदेव छतरी-भैराराम पुत्र रुगनाथराम,
- दल्लाराम पुत्र रुगाराम,

- पारू शेराराम,
- चूनाराम पुत्र ताजाराम,- चुतराराम पुत्र ताजाराम,
- नरसींगाराम पुत्र चूनाराम,

- रामाराम पुत्र चुतराराम,

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ग्राम पंचायत रतेऊ
- चंद्रवीर पुत्र नाथूराम- टीकमाराम पुत्र पेमाराम
-भूराराम पुत्र ताजाराम

-लूम्बाराम पुत्र चेतनराम
-धीराराम पुत्र टीकमाराम-खरथाराम पुत्र ताजूराम
-नरसिंगाराम पुत्र शिवकरणाराम

-मदरूपाराम पुत्र मंगलाराम
-रुगाराम पुत्र नन्दराम- ताजाराम पुत्र आदूराम चारण
- ऐसे ही रामसर से जालमनाथ, सोहननाथ, सागरनाथ, दादूनाथ अपने मवेशियों के साथ चारे की तलाश में गए हैं।

इन्हीं व अन्य ग्राम पंचायतों से सैकड़ों लोग पलायन कर चुके हैं। वहीं कई लोग इसकी तैयारी में हैं।
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करीब 70 परिवारों ने किया पलायनक्षेत्र में भीषण अकाल के कारण गांव से करीब 70 पशुपालक अपने पशुओं को बचाने के लिए उन्हें लेकर पलायन कर चुके हैं। सरकार पशु शिविर लगा लोगों को राहत दे सकती थी, लेकिन अब तो आचार संहिता भी लग गई।
- अणसी देवी, सरपंच चौखला

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जल्द राहत की जरूरत
अकाल में सबसे प्रतिकूल असर पशुधन पर पड़ा है। चारे के भाव दोगुने हो गए हैं। गरीब व आम लोगों के लिए यह पहुंच से बाहर है। बेसहारा पशुधन मौत का शिकार हो रहा है। जल्द से जल्द राहत की जरूरत है।- नरपतसिंह दूधवा, मंडल अध्यक्ष भाजपा युवा मोर्चा

प्रशासन वाकिफ

भीषण सूखे में पशुधन को बचाने का संकट पैदा हो गया है। प्रशासन पूरी तरह स्थिति से वाकिफ है, गिरदावरी की औपचारिकता के बिना पशु शिविर और चारा डिपो खोले जाने चाहिएं।
- जगदीश विश्नोई, प्रवक्ता, ब्लॉक कांग्रेस चौहटनतत्काल रोजगार की आवश्यकता
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कई जगह एक बरसात की कमी ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। भीषण अकाल के कारण चारा, पानी और अनाज तीनों की विकट समस्या है। पशुधन के लिए चारा-पानी के साथ लोगों को तत्काल रोजगार मुहैया करवाने की आवश्यकता है।

- शैतानसिंह सोढ़ा, उपप्रधान, चौहटन

चल रही है गिरदावरी


क्षेत्र के परिवार पलायन कर बाहर जा रहे हैं तो जानकारी लेती हूं। वैसे गिरदावरी चल रही है। यह पूरी तरह से होने के बाद ही वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल पाएगी।
- ममता लहुआ, तहसीलदार बायतु

आरएम 05सीए- रामसर की ग्राम पंचायत इन्द्रोई में परिवार के पलायन के बाद बंद घर।

आरएम 05सीबी - ग्राम पंचायत इन्द्रोई से चारे-पानी की तलाश में ऐवड़ के साथ पलायन करते पशुपालक।

बीडी05सीए- चौखला गांव में परिवार के बाहर जाने के बाद घर की जिम्मेदारी संभाले बुजुर्ग मां।