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रतन दवे।
बाड़मेर। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों (हिन्दू,इसाई और सिक्खों) पर अत्याचार का सिलसिला थम नहीं रहा है। वर्ष 2024 में मानवाधिकार की रिपोर्ट में 112 मामले सामने आए है। नाबालिग बालिकाओं का जबरन निकाह, धर्मांतरण और लूट की घटनाओं से परेशान है।
अंतरर्राष्ट्रीय मंच पर कई बार आवाज उठाने के बाद भी अपराधी बाज नहीं आ रहे है। सिंधी फाउंडेशन ने तो मानवाधिकार को 2018 से 2024 तक 5000 से अधिक हिन्दू युवतियों के अपहरण और जबरन निकाह की शिकायत की है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दू, सिक्ख और इसाइयों के लिए अब पंजाब, सिंध, कश्मीर और खैबर के इलाकों में अत्याचार बढ़ रहा है। धर्मांतरण करवाने के दबाव के लिए तबलीग की जोर जबदरस्ती सिंध में दलितों को परेशान कर रही है। नाबालिग बालिकाओं का अपहरण कर उनका जबरन निकाह करवाने के मामले में भी सामने आए है।
बाघा बॉर्डर से भारत आए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के जोधपुर में बसे परिवारों में से कई अब वीजा अवधि समाप्त होने पर लौटना नहीं चाह रहे है। शरणार्थी परिवार यहां बसकर अपने शेष जिंदगी बिताना चाह रहे है।
सिंध इलाके के लोगों के लिए थार एक्सप्रेस बहुत बड़ा जरिया रही लेकिन थार एक्सप्रेस को बंद कर दिया। पुलवामा हमले के बाद 2018 में बंद हुई थार एक्सप्रेस के पुन: नहीं चलने से सिंध में अत्याचार सह रहे गरीब परिवारों के पास धर्मांतरण करवाना ही एक मात्र जरिया बचने लगा है। इसमें सर्वाधिक दलित परिवार परेशान है।
बांग्लादेश में इस साल हिन्दूओं पर 2200 अत्याचार के मामले सामने आए है। इसके बाद पाकिस्तान में भी अत्याचार का अपंजीकृत आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। कश्मीर में व्यापारी परिवार भारत न आने की स्थिति में अब दुबई में कारोबार प्रारंभ कर वहां बसना शुरू हुए है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहिमयार खान जिले में तीन हिंदू युवकों का अपहरण कर लिया गया। पुलिस भी इन परिवारों को तब तक परेशान करती रही जब तक मानवाधिकार के संगठन इनके पक्ष में खड़े नहीं हुए। इस मामले में परिवार के सदस्यों की रिहाई के लिए हिन्दूओं अपहरण किया गया।
अमरकोट में मदरसों की संख्या लगातार बढ़ने लगी है। दीनी तालीम की बजाय यहां पर अब धर्मांतरण का दबाव बनाया जा रहा है। इसमें विशेषकर दलितों व पिछड़े तबके पर धर्म बदलने का दबाव है।
संघार में एक छह साल की बच्ची का अपहरण होने के बाद परिवार के सदस्य कई बार इल्तिजा कर चुके लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई है। थके हारे परिवारजनों का रो-रोकर ही बुरा हाल है।
पाकिस्तान में हिन्दू दो प्रतिशत ही बचे है। बचे हुए लोगों के लिए अब सुरक्षा का प्रबंध हों इसके लिए वे भारत की तरफ ही देखते है। थार एक्सप्रेस प्रारंभ हों तो सिंंध से बड़ी संख्या में लोग यहां रिश्तेदारों से मिलने आ सकते है।
- बाबूदान चारण, अध्यक्ष ढाटपारकर सोसायटी
Updated on:
17 Jan 2025 03:32 pm
Published on:
17 Jan 2025 03:29 pm
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