बाड़मेर. बाजरे की फसल ने इस बार किसानों की झोली भर दी है, लकिन ग्वार की फसल ने किसानों की झोली को उम्मीदों से आधा कर दिया है। जिले के करीब चालीस फीसदी क्षेत्र में तो हालत इतनी खराब हो गई है कि ग्वार उत्पादक किसानों को बुवाई की लागत मिलने के भी लाले पड़ गए हैं।
ग्वार ने किसानों की उम्मीदों को दिया झटका...कैसे। जानने के लिए पढ़े पूरी खबर
ग्वार के उत्पादन पर भारी असर, उम्मीद से आधा ही होगा उत्पादन
बाड़मेर. बाजरे की फसल ने इस बार किसानों की झोली भर दी है, लकिन ग्वार की फसल ने किसानों की झोली को उम्मीदों से आधा कर दिया है। जिले के करीब चालीस फीसदी क्षेत्र में तो हालत इतनी खराब हो गई है कि ग्वार उत्पादक किसानों को बुवाई की लागत मिलने के भी लाले पड़ गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश होते रहने से ग्वार के पौधों की ऊंचाई जरूरत से ज्यादा हो गई और फलियां लगी ही नहीं अथवा बहुत कम फाल (फलियां) आया। इसका सीधा असर उत्पादन पर हो रहा है।
कृषि विभाग की अधिकृत जानकारी के अनुसार बाड़मेर जिले में इस बार करीब तीन लाख तीस हजार हैक्टेयर में ग्वार की बुवाई हुई। एक हैक्टेयर में औसतन तीन क्विंटल ग्वार का उत्पादन होता है। इस स्थिति में इस बार जिले भर में करीब दस लाख क्विंटल ग्वार उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन खेतों में खड़ी ग्वार की फसलों ने साफ संकेत दे दिया है कि उत्पादन में करीब चालीस से पचास फीसदी की गिरावट दजज़् की जाएगी। मसलन दस लाख क्विंटल की बजाय ग्वार का उत्पादन पांच से छह लाख क्विंटल ही होगा।
फलियां नहीं
जिले के शिव, गडरारोड, रामसर, चौहटन व बाड़मेर जिला मुख्यालय के आस-पास के क्षेत्रों में खेतों की खड़ी ग्वार की फसलों से खेतों में हरियाली अवश्य दिखाई देती है, लेकिन निकट जाकर देखने पर पता चलता है कि फलियां लगी ही नहीं है अथवा बहुत कम मात्रा में लगी है।
इसलिए नहीं लगी फलियां
ग्वार की फसल में फाल (फलियां) नहीं आने का मुख्य कारण बारिश की निरंतरता रही। जुलाई माह के अंत में जिन क्षेत्रों में ग्वार की बुवाई हुई, उस फसल में फाल की कमी सवाज़्धिक है। इसकी वजह अगस्त माह में निरंतर हुई बरसात रही। ग्वार की फसल को जिस समय करीब 20 दिन का शुष्क मौसम चाहिए था, उस समय बरसात होती रही। जिससे पौधा बढ़ता गया और फलियां लगने का मौसम बीत गया।
मैंने करीब आठ हैक्टेयर में ग्वार की बुवाई की। लग रहा था कि 25 बोरी ग्वार होगा, लेकिन अब तो एक बोरी भी हो जाए तो बड़ी बात होगी। सरकार को तुरंत गिरदावरी करवाकर मुआवजा देना चाहिए। -जोधाराम प्रजापत, किसान, निवासी चक गूंगा
ग्वार की फसल को समय पर शुष्क वातावरण नहीं मिलने के कारण उम्मीद से कम उत्पादन की स्थिति है। निरंतर बरसात के कारण पौधों की बढ़वार तो हो गई, लेकिन उम्मीद के अनुरूप फलियां नहीं लगी। -वीरेन्द्रसिंह सोलंकी, उपनिदेशक कृषि विस्तार बाड़मेर
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