
राजस्थान पत्रिका चेंजमेकर महा अभियान
बाड़मेर. राजस्थान पत्रिका के चेंजमेकर महा अभियान के तहत मंगलवार को दांता स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में किसानों की परिचर्चा हुई। उन्होंने अपनी समस्याएं बताते कहा कि जमीन और जनसमस्याओं की जानकारी रखने वाले को ही जनप्रतिनिधित्व मिले। उनके अनुसार किसान देश का अन्नदाता है, लेकिन अधिकांश जनप्रतिनिधि उनकी पैरवी नहीं करते। समय पर ऋण, सब्सिडी का फायदा और पर्याप्त बिजली मिले, यह आवाज सड़क से सदन तक उठाने वाले को ही नेतृत्व करने का अवसर मिले। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद से ऊपर उठ कर ईमानदारी से काम हो, एेसे नेताओं की जरूरत है।
प्रतिक्रियाएं
-अरबों की आय देने वाले किसान वर्ग को अभी भी वह फायदा नहीं मिल रहा, जो मिलना चाहिए। बाड़मेर की स्थिति बदली है। अनार, जीरा उत्पादक क्षेत्र बनने के बाद यहां विकास की कई योजनाओं की दरकार है। जनप्रतिनिधि उनकी पैरवी करें, तो बहुत कुछ हो सकता है।- डॉ.प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक एवं प्रभारी केवीके दांता
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-नौकरी में शैक्षणिक योग्यता की जरूरत है तो जनप्रतिनिधि के लिए भी यह होनी चाहिए। पशुपालन व कृषि क्षेत्र की सही पैरवी नहीं होने से किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। हमारे प्रतिनिधि को किसानों की समस्याओं व उसके समाधान की जानकारी भी होनी चाहिए।- खुमाणसिंह राजपुरोहित, बालेरा
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किसान हित की बात करने वाले नेताओं की कमी है। नेता नहीं जानते की गांव की समस्या क्या है तो फिर वे क्या समाधान करेंगे। भ्रष्टाचार को जड़ से उखाडऩा होगा। झूठे वादे करने वालों को नकारना होगा। जनप्रतिनिधि जनता से सीधा सम्पर्क साधें और समस्याएं सुनें।- चाम्पसिंह बालेरा
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सामान्य किसान अपनी बात जनप्रतिनिधि तक नहीं पहुंचा पाता। एक पोर्टल हो जिस पर किसान खाद-बीज, बिजली-पानी सहित हर समस्या रख सके। उसका जनप्रतिनिधि व प्रशासन सात दिन में जवाब दें। एेसा नहीं होने पर कार्रवाई का भी भय हो, तभी सही मायने में लोकतंत्र स्थापित होगा।- विजयसिंह खारा
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चुनाव के दौरान वादे खूब होते हैं, लेकिन इनको पूरा नहीं किया जाता। किसानों की आवाज तो दब कर रह गई है। ईमानदार छवि के नेताओं की कमी से आमजन व किसान ***** रहा है। किसानों की समस्या का हल नहीं होगा तो देश का विकास कैसे होगा।- बगताराम सोडियाल
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कृषि और पशुपालन क्षेत्र देश के विकास का मुख्य आधार है पर अधिकांश जनप्रतिनिधि न तो गांव की जानकारी रखते हैं और ना ही क्षेत्र की समझ। एेसे में किसान, कृषि और पशुपालन क्षेत्र की उपेक्षा हो रही है। जब तक किसान आत्मनिर्भर नहीं होगा, देश का विकास नहीं होगा।- महेन्द्रसिंह हरसाणी
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जनप्रतिनिधि की छवि साफ-सुथरी होनी चाहिए। जनप्रतिनिधि विकास की बात करने नहीं आते। किसानों को समय पर बिजली मिले। खेती के दौरान सही जानकारी प्राप्त हो और पशुपालन के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के मार्फत किसान वर्ग को फायदा मिलना चाहिए। - बाबूलाल कवास
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नेता ही ईमानदार नहीं होगा तो देश का विकास कैसे होगा। बाड़मेर के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो परिवर्तन आया है। अब किसानों को उन्नत बीज, खाद के साथ बिजली, पानी की जरूरत है। सबके विकास की सोच नेता रखें, आज विकास होगा तभी हमारी भावी पीढ़ी को फायदा मिलेगा।- चैनाराम जूनापतरासर
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देश का विकास किसानों की मेहनत पर टिका है, लेकिन उनकी बात कहने वाले जनप्रतिनिधि कम हैं। उन्हें किसानों की समस्याओं की जानकारी नहीं है और ना ही सोच। जनप्रतिनिधित्व करने वाले नेता को हर वर्ग के विकास की सोच रखनी चाहिए। एेसा होने से ही सबको फायदा मिलेगा।- भभूताराम, काऊ का खेड़ा
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जिले में अरबों रुपए का जीरा पैदा हो रहा है। बावजूद इसके यहां के किसानों को गुजरात जाकर जीरा बेचना पड़ रहा है। जीरा मंडी की घोषणा के बावजूद काम काफी धीमी गति से चल रहा है। हमारे जनप्रतिनिधि पैरवी कर यह तय करें कि किसान को समय पर ऋण, बिजली, पानी मिले।- कैलाश गौड़, बाड़मेर
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जनप्रतिनिधि वह हो जो जनसेवक बन कर सेवा करे। बिजली, पानी, खाद,बीज सहित हर समस्या को लेकर किसानों को जनप्रतिनिधि के चौखट पहुंचना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधि खुद जाकर किसान से पूछें कि उसकी समस्या क्या है और उसका समाधान करें।- मूलाराम कवास
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जनप्रतिनिधि परिवार का एक तरह से मुखिया होता है। पूरा क्षेत्र उसका परिवार है। परिवार के हर सदस्य की समस्या का समाधान करने के लिए उसे जनता के बीच जाना चाहिए। किसानों को उपज का सही दाम मिले, इसके लिए ऑन लाइन भाव की जानकारी किसान को मिले, यह तय हो।- गणपतसिंह रड़वा
Published on:
11 Apr 2018 07:41 pm
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