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तरक्की बना जहर: जोधपुर की औद्योगिक प्रदूषण से बस्तियां डूबीं, बालोतरा में लोग घर छोड़ने को मजबूर

जोधपुर की औद्योगिक इकाइयों से निकले रासायनिक अपशिष्ट ने बालोतरा के अराबा समेत कई गांवों को चपेट में ले लिया। रहवासी इलाकों में पानी घुसने से प्रशासन ने घर खाली करवाए। ग्रामीण स्कूलों, खेतों और भवनों में शरण ले रहे हैं। पढ़िए जयकुमार भाटी की स्पेशल रिपोर्ट...

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Toxic Wastewater

रासायनिक पानी ने घर छोड़ने को किया मजबूर (फोटो- पत्रिका)

बालोतरा: कल्याणपुर उपखंड क्षेत्र की अराबा दुदावता ग्राम पंचायत के अंतर्गत अराबा पुरोहितान, अराबा चौहान, अराबा नागणेचा, निंबाखेड़ा और डोली सहित आसपास के कई गांव इन दिनों जोधपुर की औद्योगिक इकाइयों से आ रहे रासायनिक अपशिष्ट पानी की चपेट में हैं।


बता दें कि प्रदूषित पानी का बहाव इतना तेज हो गया है कि यह अब रहवासी बस्तियों में घुसने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सोमवार को ग्रामीणों को घर खाली करने के आदेश जारी किए हैं।


लोग खेतों और सरकारी भवनों में शिफ्ट


अराबा पुरोहितान के पूर्व सरपंच नरपत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि गांव के करीब 60 घरों में लगभग 280 लोग रहते हैं। अब गांव के तीनों ओर रासायनिक पानी भर गया है, जिससे बस्ती घिर गई है। प्रशासन की हिदायत पर ग्रामीण सरकारी स्कूलों, पंचायत भवनों और अपने खेतों में रहने को मजबूर हैं।


हालांकि, अचानक घर छोड़ने की स्थिति में ग्रामीणों के लिए भोजन, बर्तन, गैस सिलेंडर, बिस्तर जैसी जरूरी चीजें ले जाना कठिन हो रहा है। फिलहाल, अराबा चौहान गांव के 15 परिवारों को घर खाली कर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है। अन्य प्रभावित गांवों से भी लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।


कई वर्षों से झेल रहे यह सजा


रालोपा नेता थान सिंह डोली ने बताया कि प्रदूषित काले पानी की समस्या ग्रामीणों के लिए नई नहीं है। बीते कुछ दिनों से बारिश के पानी के साथ ही इसका बहाव और असर इतना बढ़ गया है कि अब लोगों को अपने आशियाने छोड़ने पड़ रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।


परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया


कई घरों के आंगन तक पानी पहुंचने के बाद उन्हें दूसरी सुरक्षित जगह स्थानांतरित किया गया है। अब तक 11 परिवार खेतों में बने अपने कच्चे-पक्के मकानों में चले गए हैं, जबकि 3 परिवारों को प्रशासन की ओर से तय वैकल्पिक स्थानों पर रुकवाया गया है।
-सुशील कुमार यादव, कलेक्टर

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