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पूर्व मंत्री की कार्डियक अरेस्ट से मौत, अंतिम विदाई पर छलकी आंखें

दशकों तक लोगों के दिलों में राज करने वाले मानकुराम सोढ़ी पांच बार लगातार विधायक, तीन बार सांसद और मध्यप्रदेश शासन में पृथक राजस्व मंत्री भी रहे। दस जनवरी को 82 साल की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।

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Ajay Shrivastava

Jan 11, 2017

mankuram sodhi

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कोण्डागांव.
ऐसी शख्सियत जिसे लोग बस्तर के गांधी नाम से जानते थे। दशकों तक लोगों के दिलों में राज करने वाले मानकुराम सोढ़ी पांच बार लगातार विधायक, तीन बार सांसद और मध्यप्रदेश शासन में पृथक राजस्व मंत्री भी रहे। सीधे-सादे व्यक्ति के धनी मानकुराम ने दस जनवरी को 82 साल की आयु में अपनी अंतिम सांस ली और इस दुनिया से रुखसत हुए। उनके अंतिम विदाई पर बस्तरवासियों की आंखें छलक उठी। बुधवार की शाम चार बजे उनके गृह निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान बस्तर के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं समेत हजारों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।


दस दिन जूझते रहे जिंदगी और मौत से

मानकुराम सोढ़ी के पुत्र व पूर्व मंत्री शंकर सोढ़ी ने बताया, 1 जनवरी को वे घर पर गिर गए थे। इसके बाद उनका रायपुर में उपचार चल रहा था। उपचार के दौरान उनके स्वास्थ्य में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहा। 10 जनवरी की रात पौने नौ बजे कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हुई।


लगातार पांच बार विधायक बनने का रिकार्ड

82 वर्षीय मानकुराम सोढ़ी ने 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव के लिए अपना पर्चा भरा। इसके बाद इन्होंने कभी मुड़ कर नहीं देखा। पहला विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 1984 तक वे लगातार पांच बार विधायक रहे। इसके बाद 1984 से लगातार तीन बार सांसद बनने के साथ ही इन्हें कभी ना हारने वाला नेता का भी खिताब मिला। इसी दौरान मध्यप्रदेश शासन में 1980 से 84 तक अर्जुन सिंह के मंत्रालय में पृथक राजस्व मंत्री भी रहे है।


शिक्षक से राजनेता तक का सफर

वरिष्ठ कांग्रेस टीएस ठाकुर बताते हैं, कोण्डागांव के रहने वाले मानकूराम अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद शिक्षक बने। इस दौरान उनका संपर्क बस्तर राजघराने से था। पढ़े-लिखे मानकूराम पर बस्तर राजघराने से संबंध के चलते राजा पार्टी के लिए केशकाल विधानसभा से पर्चा भरा और चुनाव भी जीते। बाद में श्यामाचरण शुक्ल ने मानकूराम सोढ़ी को कांग्रेस में प्रवेश दिलाया। कांग्रेस में प्रवेश के बाद वे ताउम्र कांग्रेस का ही प्रतिनिधित्व करते रहे।


अंतिम समय में भूला दिए गए मानकू

हालांकि इतने बड़े व्यक्तित्व के बावजूद मानकूराम सोढ़ी को भी भूला दिया गया। अंतिम क्षण में वे एक दशक से अधिक समय से घर पर ही रहते रहे। उनकी राजनीतिक सक्रियता भी सीमित रह गई। उनके बाद उनके बेटे उनके राजनीतिक गद्दी नहीं संभाल सके। शंकर ठाकुर भले ही मंत्री बने लेकिन उनका दर्जा मानकूराम सोढ़ी की तरह नहीं रहा।

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