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मंत्री के गृह ग्राम का कोई भी अध्यक्ष पांच साल नहीं टिकता, कराया तांत्रिक अनुष्ठान, पढ़ें खबर

तीनों पूर्व अध्यक्ष साधराय, मेहतरु व केशवराम ने तांत्रिक अनुष्ठान कराया, ताकि अब बनने वाले अध्यक्ष को समस्या का सामना न करना पड़े।

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Blind faith, Black magic, Tantra-Mantra, CG State minister, Cooprative minister

बेमेतरा/नवागढ़. सहकारिता मंत्री डीडी बघेल के गृहग्राम कूंरा में सहकारी समिति में लगातार तीन बार यह स्थिति बन रही है कि कोई भी अध्यक्ष पांच साल का कार्यकाल पूरी नहीं कर पाता। हद तो इस बार तब हो गई, जब केशवराम साहू पांच साल क्या पांच महीने भी पद पर नहीं टिक सके। अध्यक्ष बनने सदस्यों को पुरी यात्रा कराने वाले केशव की अध्यक्ष का यात्रा अधूरी होते ही कूंरा समिति के घायल दो पूर्व अध्यक्षों ने इस समस्या का हल ढूंढने के लिए तांत्रिक की शरण ली।

तीनों ने गले में ताबीज पहन रखा है

तांत्रिक ने कहा कि तीसरे को भी लेकर आओ। इसके बाद रविवार को नवागढ़ के निकट एक गांव में तीनों पूर्व अध्यक्ष साधराय मधुकर, मेहतरु साहू व केशवराम ने तांत्रिक से अनुष्ठान कराया, ताकि अब वहां बनने वाले अध्यक्ष को समस्या का सामना न करना पड़े। तांत्रिक की सलाह पर तीनों ने गले में ताबीज पहन रखा है, जो इनके राजनीतिक वजूद को बरकरार रखेगा।

तीनों अध्यक्ष को पद छोडऩा पड़ा

इस तंत्र क्रिया की पुष्टि करते हुए साधराय मधुकर ने कहा कि तीनों के पद का समय पूर्व जाने के मामले में केशव कांड सामने आया। किसानों के हित में धान टोकन देने, चावल की कमी में विभागीय आदेश का पालन नहीं करने व इन दोनों मामले के कारण पद पर नहीं रहने के आरोप में तीनों अध्यक्ष को पद छोडऩा पड़ा। 2007 से 2012 के बीच साधराय मधुकर 5 की जगह केवल डेढ़ साल तक ही अध्यक्ष रह सके। 2012 से 2017 का कार्यकाल मेहतरु पूरा नहीं कर सके। इस बीच हाल में संपन्न चुनाव में निर्वाचित केशवराम साहू तो 50 दिन भी सत्ता का सुख नहीं पा सके। कोर्ट के आदेश पर समिति ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

विज्ञान के युग में भी तंत्र-मंत्र भारी
आधुनिक विज्ञान के इस युग में भी लोगों के जेहन में अंधविश्वास इस कदर घर गया है कि तांत्रिकों का धंधा खूब फल-फूल रहा है। लोग आज भी चमत्कार को नमस्कार करते हैं और नीबू व लाल मिर्च के सहारे किस्मत को बदल सकते हैं। ऐसा कोई सामान्य आदमी करें तो भी बात समझ में आती है कि किंतु पढ़ा-लिखा आदमी यह सब करता है तो एकाएक विश्वास ही नहीं होता है। समाज को ऐसे अंधविश्वास और चमत्कार से दूर करने जागरूक करने की महती आवश्यकता है।

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