15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पढ़े, बैतूल से जुड़ी है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादे बैतूल शहर से जुड़ी हुई हैं। करीब ८६ साल पहले जब देश गुलाम था उस दौरान गांधी जी हरिजन उद्धार कार्यक्रम में भाग लेने बैतूल प्रवास पर आए थे। उन्होंने न सिर्फ कोठीबाजार स्थित गांधी चौक में आम जनसमूह को संबोधित किया।

2 min read
Google source verification
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें

Bed on which Gandhiji rested

बैतूल। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादे बैतूल शहर से जुड़ी हुई हैं। करीब ८६ साल पहले जब देश गुलाम था उस दौरान गांधी जी हरिजन उद्धार कार्यक्रम में भाग लेने बैतूल प्रवास पर आए थे। उन्होंने न सिर्फ कोठीबाजार स्थित गांधी चौक में आम जनसमूह को संबोधित किया। बल्कि रात्रि विश्राम भी बैतूल में किया था। जिस भवन में गांधीजी ने रात्रि विश्राम किया था वह आज भी संरक्षित तौर पर मौजूद हैं और गांधीजी का चरखा भी रखा हुआ है।
देश भर में हरिजन यात्रा के तहत गांधी जी २९ नवंबर १९३३ को छिंदवाड़ा से बैतूल पहुंचे थे। रास्ते में गांधी जी खैरवानी और मुलताई भी कुछ समय के लिए रुके। मुलताई में उन्होंने विशाल सभा को संबोधित भी किया था। मुलताई की इस सभा में तहसील की ओर से गांधी जी को २०९ रूपए की थैली भी हरिजन कोष के लिए दी गई। उस दिन रात्रि के समय गांधी जी बैतूल पहुंचे। उस समय कड़ाके की सर्दी के बाद भी विशाल जन समूह गांधी जी के दर्शनों के लिए एकत्रित था। गांधी जी ने उस रात्रि को बैतूल में ही विश्राम किया। रमन गोठी ने बताया कि बगीचे में गांधी रुके थे। उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। इसी जगह पर आज भी वह पलंग सुरक्षित रखा हुआ है। गांधीजी ने यहां पर अपना चरखा भी छोड़ा था। वही उसी हालत में आज भी रखा हुआ है। इसके बाद गांधी जी ३० नवंबर को खेड़ी और बारहलिंग आश्रम गए थे।
गांधीजी को थैली में भेंट किए थे ४०१ रूपए
गांधी जी ने बैतूल के कोठीबाजार स्थित गांधी चौक में एक विशाल सभा को भी संबोधित किया था। इस सभा की अध्यक्षता दीपचंद गोठी ने की थी। सभा में बैतूल जिला की ओर से गांधीजी को ४०१ रूपए की एक थैली भेंट की गई थी। तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष रामदयाल खंडेलवाल तथा जिला परिषद् की ओर से बाबूलाल ने मांग पत्र पड़ा था। बेैतूल में गांधीजी को गुजराती मंत्री मंडल की ओर से प्रेम शंकर भाई ने एक और थैली भेंट की थी।
ढोढरामोहरा में चार हजार लोगों ने किया था स्वागत
बैतूल में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद गांधी जी ने रेल मार्ग से इटारसी की ओर प्रस्थान किया था। रास्ते में शाहपुर-भौंरा के पास पडऩे वाले ढोढरामोहरा रेलवे स्टेशन पर चार हजार लोगों ने गगनभेदी नारों के साथ गांधी जी का जोरदार स्वागत किया था। गरीब आदिवासियों की पुकार पर गांधी जी अपने डिब्बे से बाहर उतर आए थे। मनकी बाई ने आदिवासियों से एकत्रित की गई एक-एक पैसे की राशि की थैली गांधीजी को भेंट की थी। इस मौके पर गांधीजी ने लोगों को मांस, मदिरा छोडऩे की बात कही थी।