
सतपुड़ा जलाशय के 5 गेटों से तवा नदी में प्रति सेकंड छोड़े गए 17 हजार क्यूबिक फीट पानी का विहंगम दृश्य।
सारनी. रात भर से हो रही तेज बारिश के बाद सतपुड़ा जलाशय में बाढ़ के पानी आने का सिलसिला जारी है। जलाशय का जलस्तर बढऩे पर सोमवार सुबह सतपुड़ा डेम के 5 गेट 4-4 फीट की ऊंचाई पर खोलकर लेबल मेंटेंन किया गया। सुबह 8:30 से देर शाम तक 5 गेटों से तवा नदी में पानी छोडऩे का दौर चलता रहा। हालांकि इस बीच गेटों की ऊंचाई कम, ज्यादा की गई। बताया जा रहा है कि सुबह जिस वक्त डेम का जलस्तर बढ़ा था। उस समय 17 हजार क्यूबिक फीट पानी सतपुड़ा से तवा नदी में प्रति सेकंड की रफ्तार से छोड़ा जा रहा था। प्रति सेकंड 17 हजार क्यूबिक फीट पानी तवा नदी में छोड़े जाने से पुनर्वास कैंप पहुंच प्रमुख मार्ग नांदिया घाट और शिवनपाठ रपटा पर बाढ़ का पानी आने से चोपना क्षेत्र के गांवों का संपर्क शहरी क्षेत्र से दिन भर टूटा रहा। गौरतलब है कि नांदिया घाट रपटे पर 3 गेट और शिवनपाठ रपटे पर 1 गेट का पानी चढ़ जाता है। इसके बाद नदी पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है।
24 घंटे में 22 एमएम बरसात
बीते 24 घंटे में सारनी क्षेत्र में 22 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। इसी के साथ बरसात का आंकड़ा सोमवार सुबह 8 बजे तक 382 मिलीमीटर पर पहुंच गया है। बीते साल की तुलना में इस वर्ष की औसत वर्षा बेहतर है। सारनी क्षेत्र में पूरे सीजन में सामान्य वर्षा 1500 मिलीमीटर है। 1433 फीट जल भरण क्षमता वाले सतपुड़ा जलाशय का लेबल 23 जुलाई तक 1430 फीट मेंटेंन किया गया।
नहीं चली नाव
जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी अंतर्गत लोनिया पंचायत नदी के दूसरे छोर पर है। इस पंचायत में प्रवेश के लिए एकमात्र साधन नाव है। बरतसा के दिनों में राजडोह नदी में बाढ़ आने पर पंचायत अंतर्गत आने वाले गांवों का संपर्क पूरी तरह टूटा रहता है। सोमवार सुबह से चल रही बाढ़ के चलते नदी में नाव चालन बंद रहा। ग्रामीण बताते हैं कि नदी पर पुल निर्माण के लिए खड़े किए जा रहे बीम की वजह से पानी का कटाव तेज रहता है। बाढ़ में नाव चालन मुश्किल भरा काम होता है। इस वजह से नदी में बाढ़ आने पर नाव चालन पूरी तरह बंद रहता है।
एसएच पर गिरा पेड़
स्टेट हाइवे 43 पर सारनी-खैरवानी के बीच आंवले का विशालकाय पेड़ गिर गया। जिससे आवागमन बाधित रहा। हालांकि समय रहते पेड़ की छटिंग कर देने से मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया। गौरतलब है कि सारनी-खैरवानी के बीच घना जंगल है। सडक़ निर्माण के दौरान पेड़ों के आसपास की मिट्टी निकाल ली गई है। जिससे पेड़ कमजोर होकर सडक़ के दोनों छोर पर खड़े हैं। आंधी चलने या बरसात होने पर कमजोर जड़े वाले पेड़ सडक़ पर गिर जाते हैं।
Published on:
24 Jul 2018 11:35 am
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