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टीचर ने बदली स्कूल की सूरत, खुद के खर्चे से पाठशाला को बनाया सुंदर

टीचर की पहल के बाद गणितीय सूत्रों व ज्यामिति आकृतियों से सजा स्कूल...

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बैतूल. ईमानदारी एवं कर्मठता के साथ यदि हम अपना काम करें तो कार्य स्थल के साथ-साथ समाज भी आपके कार्यों का लोहा मानता है। बस एकाग्रता व लगन से मेहनत की आवश्यकता होती है और बड़े से बड़ा कार्य भी सरल हो जाता है। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है बैतूल जिले के गौठाना स्कूल में पदस्थ शिक्षक मदनलाल डढोरे ने। जिन्होंने अपने ही बल पर गौठाना स्कूल की सूरत बदल दी है। खुद के वेतन से 51 हजार रुपए खर्च कर उन्होंने स्कूल को सुंदर बना दिया है। टीचर मदनलाल की इस पहल की न केवल गांव में बल्कि पूरे जिले में तारीफ हो रही है।

टीचर ने बदली स्कूल की सूरत
कोरोना महामारी के कारण दो साल तक स्कूल बंद रहने के कारण न तो स्कूल भवन की मरम्मत हुई और न ही पुताई ऐसे में स्कूल में पढ़ाई के लिए अच्छा वातावरण नहीं बन पा रहा था। इस बात को जब गौठाना स्कूल के टीचर मदनलाल डढोरे ने महसूस किया तो उन्होंने खुद के ही खर्च पर स्कूल की सूरत बदलने की ठानी और फिर अपने वेतन से 51 हजार रुपए खर्च कर पूरे स्कूल की रंगत बदल डाली। बीते दिनों पड़े अवकाशों के दौरान टीचर मदनलाल ने खुद के खर्च पर स्कूल की पहले पुताई कराई और फिर स्कूल की दीवारों पर पेंटिंग के साथ साथ ज्यामिति आकृतियों एवं गणितीय सूत्र भी उकेरे। जिससे बच्चे गणित के प्रति डर की भावना को हटाकर गणित की कठिन अवधारणाओं को सरल तरीके से सीख सकें। गणितीय सामान्य ज्ञान के स्लोगन दीवारों पर लिखे होने के कारण अब स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे इन्हें सरलता से पढ़ व समझ पा रहे हैं जिससे उनकी पढ़ाई में काफी मदद मिल रही है।

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टीचर की पहल की तारीफ
स्कूल की सूरत बदलने वाले टीचर मदनलाल के इस काम के बाद उनकी हर तरफ तारीफ हो रही है। गांव के लोगों के साथ ही जिले भर में लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। शाला प्रबंधन समिति की अध्यक्ष सरिता तुमड़ाम व पालक हेमंत राघोते ने बताया कि मरम्मत व पुताई से शाला का वातावरण शिक्षा के और अनुकूल हो गया है। शिक्षक के इस सराहनीय कार्य के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं छात्र-छात्राओं ने स्वागत करते हुए स्कूल व समाज के लिए नई प्रेरणादायी पहल बताकर अन्य शिक्षकों के लिए अनुकर्णीय बताया।

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