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जल जीवन मिशन से गांवों की तस्वीर बदलने का दावा, हकीकत में आज भी पानी के लिए करना पड़ता है संघर्ष

जल जीवन मिशन योजना के तहत पीएचई विभाग जिले की तस्वीर को बदलने का दावा कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन लगने के बाद भी महिलाओं को रोज सुबह पीने के पानी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

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भैंसदेही के देहगुड़ पंचायत के गोलीढाना में महिलाओं को पीने के पानी के लिए करना पड़ता है संघर्ष

In Golidhana of Dehgud Panchayat of Bhainsdehi, women have to struggle for drinking water.

बैतूल। जल जीवन मिशन योजना के तहत पीएचई विभाग जिले की तस्वीर को बदलने का दावा कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन लगने के बाद भी महिलाओं को रोज सुबह पीने के पानी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। जबकि विभाग का दावा है कि वर्ष २०२० के पहले जिले में ६९ हजार ३०० नल कनेक्शन हुआ करते थे, लेकिन बीते दो सालों में नल कनेक्शनों की संख्या बढ़कर १ हजार ४८ हजार १२६ कर दी गई हैं। बावजूद इसके गर्मी का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की आहट गहराने लगती है। कई गांव तो ऐसे हैं जहां नलजल योजना नहीं होने के कारण साल भर पानी का संकट बना रहता है। ऐसे २३० गांवों में पीएचई द्वारा जल जीवन मिशन के तहत पेयजल के लिए टंकी निर्माण, पाइप लाइन बिछाने, नल कनेक्शन दिए जाने पर काम कराया जा रहा है। वैसे जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं, लेकिन विभाग का दावा है कि इस साल निर्धारित लक्ष्य से ढाई हजार नल कनेक्शन अधिक किए गए हैं।
जो गांव हैंडपंप के सहारे थे वहां अब नलों से आ रहा पानी
पीएचई विभाग की माने तो जिले के २३० गांव ऐसे थे जहां पेयजल के लिए ग्रामीणों के पास माह हैंडपंप का ही सहारा था। यह हैंडपंप भी गर्मी के शुरू होते ही साथ छोड़ दिया करते थे। ऐसे में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता था, लेकि न जलजीवन मिशन के लागू होने के बाद पीएचई विभाग द्वारा ऐसे गांवों का सर्वे किया गया इन गांवों में पेयजल की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए जाने के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत कार्ययोजना तैयार की गई। वर्तमान में इनमें से १९० गांवों में पीने का पानी पहुंचाए जाने के लिए काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। ३५ गांवों में पेयजल की स्पलाई भी शुरू कर दी गई है। हालांकि जिन गांवों में नलजल योजना से सप्लाई की बात कहीं जा रही है उनमें कई गांवों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जिसके कारण विभाग को ठेकेदारों का अनुबंध समाप्ति करने सहित ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई तक करना पड़ी है।
लक्ष्य से ढाई हजार अधिक नल कनेक्शन करने का दावा
पीएचई विभाग की माने तो वर्ष २०२१-२२ के लिए २५ हजार नल कनेक्शन किए जाने का लक्ष्य दिया गया था। लक्ष्य के विरूद्ध विभाग द्वारा जिले में २७ हजार ३५५ नल कनेक्शन किए जाने का दावा किया जा रहा है। विभाग का कहना है जलजीवन मिशन में तेजी से नल कनेक्शन करने का काम चल रहा है। बीते दो सालों के दौरान जल जीवन मिशन में जिले में ७८ हजार ८२४ कनेक्शन किए जा चुके हैं। वहीं वर्ष २०२० के पहले जहां जिले में नल कनेक्शनों की कुल संख्या ६९ हजार ३०० हुआ करती थी, जो अब बढ़कर १ लाख ४८ हजार १२६ पर पहुंच गई है। पहले नलों से पेयजल सप्लाई का कवरेज २४ प्रतिशत हुआ करता था लेकिन अब यह बढ़कर ५४ प्रतिशत हो चुका है। यानि तेजी से सभी गांव योजना के तहत कवर किए जा रहे हैं।ताकि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिल सके। वर्तमान में शेष ६४९ गांवों में जलजीवन मिशन के तहत पानी पहुंचाने के लिए योजना बनाकर तैयार है। जिसके शासन से स्वीकृत होते ही इन गांवों में भी काम शुरू कर दिया जाएगा। वर्ष २०२४ तक पूरे जिले में नलों के माध्यम से ही पीने का पानी पहुंचाए जाने का लक्ष्य रखा गया है।