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प्रभारी मंत्री के निर्देश पर तीन दिन में हटाए जाने थे ७३ अधीक्षक,एक भी नहीं हटे

१४० में से ७३ अधीक्षक तीन वर्ष से अधिक समय से डटे।मंत्री के निर्देश को हुए २० दिन से अधिक समय।

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बेतुल

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Ashok Waiker

Jan 19, 2018

Process to remove superintendents

Process to remove superintendents i

बैतूल। मंत्रियों के निर्देश को अधिकारियों द्वारा कितना तवज्जो दिया जाता है,इसका उदाहरण अधीक्षकों को हटाए जाने के निर्देश से बेहतर तरीके समझा जा सकता है। प्रभारी मंत्री ने अपने दौर में बैतूल आने पर जिले में तीन वर्ष से अधिक समय से छात्रावास में जमे अधीक्षकों को हटाकर उनके मूल विभाग में भेजने के निर्देश दिए थे। प्रभारी मंत्री ने तीन दिन में अधीक्षिकों को हटाने के लिए कहा था। प्रभारी मंत्री के निर्देश को २० दिन से अधिक समय बीत गया है। एक भी अधीक्षक को हटाया नहीं गया है। जिले के १४० छात्रावासों में अभी भी ७३ अधीक्षक पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से डटे हुए हैं। अधिकारियों द्वारा अधीक्षकों को हटाए जाने का प्रस्ताव तैयार करने की बात कही जा रही है।
जिले के प्रभारी मंत्री लाल सिंह आर्य २७ दिसंबर २०१७ को नए आरटीओ भवन का शुभारंभ करने बैतूल आए थे। उन्होंंने मंच से जिले के छात्रावासों मेंं तीन वर्ष से अधिक समय से जमे अधीक्षकों को हटाकर उनके मूल विभाग में भेजन के निर्देश दिए थे। मंत्री आर्य के निर्देश को २० दिन से अधिक समय हो गया है,लेकिन एक भी अधीक्षक को नहीं हटाया गया है। अधीक्षक जहां के तहां डटे हुए हैं। जिले भर के १४० एससी और एसटी छात्रावास में ७३ अधीक्षक पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से डटे हुए हैं। कुछ अधीक्षको १० से १५ वर्षों से अधीक्षक बने हुए हैं। इन्हें आज तक इनके मूल विभाग नहीं भेजा गया है,जबकि शासन के भी आदेश हैं कि तीन वर्ष के बाद अधीक्षक को उनके मूल विभाग में वापस भिजवाया जाना है। अधिक समय तक अधीक्षक बने रहने को लेकर बताया जा रहा है कि राजनीति के चलते अधीक्षक नहीं हटाए जाते। उन्हें मूल विभाग में नहीं भेजा जाता। दोबारा अन्य छात्रावास में अधीक्षक बन दिए जाते हैं। छात्रावास में भ्रष्टाचार को लेकर अधीक्षक के पद पर जमे रहते हैं।
एक अधीक्षिका को हटाया तो हंगामा
्रप्री मैट्रिक कन्या छात्रावास और आश्रम अंग्रेजी आठनेर की अधीक्षिका रुपा साहू को मंत्री के निर्देश के बाद हटाया गया तो छात्रों ने ५ जनवरी २०१८ को हंगामा कर दिया था। छात्राओं द्वारा पूर्व अधीक्षिका को ही पदस्थ करने की मांग की जा रही थी। साहू की जगह पर सुमन मोरले को पदस्थ किया था। नई अधीक्षिका मोरले अभी इस छात्रावास में नहीं जा रही है। अन्य तीसरी अधीक्षिका को इस छात्रावास का प्रभार दिया है।
ओबीसी के हैं दो छात्रावास
जिले में ओबीसी वर्ग के मात्र दो ही छात्रावास है। यहां के छात्रावासों में अधीक्षकों को कुछ समय पूर्व में ही बदला गया है। जिससे यहां पर किसी अधीक्षक को नहीं हटाया जाना है। ओबीसी छात्रावास के अधीक्षक यथावत रहेंगे।
केस एक
१९ वर्ष से हंै अधीक्षिका
प्राथमिक शाला आष्टी की सहायक अध्यापक सरिता कुमरे १३ अक्टूबर १९९९ से अधीक्षक है। वर्तमान में कुमरे आदिवासी प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास में आष्टी में अधीक्षिका के पद पर पदस्थ है। अधीक्षक को १९ वर्षों बाद भी अपने मूल विभाग में नहीं भेजा गया है।
केस दो
१३ वर्ष से हंैं अधीक्षक
कार्यालय आदिम जाति कल्याण विभाग बैतूल में व्यायाम शिक्षक राजेश दीक्षित पिछले १३ वर्षों से १५ दिसंबर २००५ से अधीक्षक है। वर्तमान में बैतूल के उत्कृष्ट बालक छात्रावास में पदस्थ है। दीक्षित को अपने मूल विभाग में नहीं भेजा गया है।
जिले में कुछ छात्रावास १४२
एससी और एसटी के छात्रावास- १४०
ओबीसी के छात्रावास- ०२
तीन वर्षों से अधिक समय से जमे अधीक्षक-७३

इनका कहना
अधीक्षकों की सूची तैयार कर ली गई है। जल्द ही तीन वर्ष से अधिक समय से जमे अधीक्षकों को हटाया जाएगा।
अमरनाथ सिंह, सहायक आयुक्त अजाक विभाग बैतूल।